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अयोध्या 2027 ग्राउंड रिपोर्ट: सभी 5 विधानसभा सीटों का सटीक जातीय विश्लेषण और चुनावी समीकरण
अवध की बात1 जनवरी 2026

अयोध्या 2027 ग्राउंड रिपोर्ट: सभी 5 विधानसभा सीटों का सटीक जातीय विश्लेषण और चुनावी समीकरण

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Chief Editor

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अयोध्या की सभी 5 विधानसभा सीटों का विस्तृत 2027 चुनावी रिपोर्ट। गोसाईगंज, मिल्कीपुर, बीकापुर, अयोध्या और रुदौली का जातिगत और सियासी विश्लेषण।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2027 की सुगबुगाहट अभी से तेज हो गई है। रामनगरी अयोध्या न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रदेश की राजनीति का बैरोमीटर भी है। अयोध्या जिले की 5 विधानसभा सीटें—गोसाईगंज, मिल्कीपुर, बीकापुर, अयोध्या सदर और रुदौली—हर बार नए समीकरण बनाती और बिगाड़ती हैं। इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में हम जानेंगे हर सीट का हाल, जातिगत गणित और टिकट के दावेदारों की स्थिति।

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अयोध्या की बड़ी राजनीति को समझने के लिए विनय कटियार पर हमारी विशेष रिपोर्ट पढ़ें।

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1. गोसाईगंज विधानसभा (276): बाहुबलियों की टक्कर और टिकट का संकट

गोसाईगंज विधानसभा सीट हमेशा से 'हाई-वोल्टेज' रही है। यहां मुकाबला पार्टियों से ज्यादा बाहुबलियों के बीच होता है। 2022 में सपा के अभय सिंह ने भाजपा की आरती तिवारी (खब्बू तिवारी की पत्नी) को हराया था, लेकिन जीत का अंतर बहुत कम था।

भाजपा के लिए धर्मसंकट: खब्बू तिवारी (2017 विजेता) और अभय सिंह (2022 विजेता, जो अब भाजपा के करीब हैं) दोनों दावेदार हैं। एक को टिकट देने पर दूसरे की नाराजगी तय है। भाजपा यहां किसी नए चेहरे पर दांव लगा सकती है। वहीं सपा के लिए अभय सिंह के पाला बदलने के बाद नया, मजबूत चेहरा ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती है।

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यहाँ क्लिक करके गोसाईगंज विधानसभा की डिटेल्ड ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ें।

विस्तृत रिपोर्ट: गोसाईगंज का पूरा समीकरण और टिकट का खेल समझें

2. मिल्कीपुर (SC) विधानसभा (273): अयोध्या का सबसे बड़ा 'Swing' क्षेत्र

मिल्कीपुर (सुरक्षित) सीट ने 2025 उपचुनाव में भाजपा को बड़ी जीत देकर चौंका दिया था। यह जीत अयोध्या 2024 लोकसभा के झटकों के बाद भाजपा के लिए 'संजीवनी' बनकर आई। इसने साबित किया कि दलित+OBC समीकरण सही हो तो भाजपा अजेय है।

  • भाजपा की उलझन: पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ (संगठन के चहेते) बनाम चंद्रभानु पासवान (2025 के विजेता)। क्या पार्टी 'विनिंग कैंडिडेट' को रिपीट करेगी या पुराने वफादार को मौका देगी?
  • सपा की चुनौती: 2025 की हार ने सपा के कोर वोट बैंक (यादव+मुस्लिम+दलित) में सेंधमारी उजागर कर दी है। सपा को यहां PDA फॉर्मूले को नए सिरे से गढ़ना होगा।

मिल्कीपुर 2027 में विचारधारा से ज्यादा 'कैंडिडेट केमिस्ट्री' पर लड़ा जाएगा। दलित और पासी मतदाता यहां किंगमेकर की भूमिका में हैं।

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मिल्कीपुर का विस्तृत विश्लेषण पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

विस्तृत रिपोर्ट: मिल्कीपुर में भाजपा की जीत का राज और 2027 की चुनौती

3. बीकापुर विधानसभा (274): कागज़ पर किसी की नहीं, ज़मीन पर सबकी

बीकापुर एक सामान्य सीट है जहां ब्राह्मण और पासी मतदाता हार-जीत तय करते हैं। 2017 में भाजपा 25,000 वोटों से जीती, लेकिन 2022 में यह अंतर घटकर मात्र 5,500 रह गया। यह गिरावट बताती है कि बीकापुर अब 'सेफ सीट' नहीं, बल्कि 'बैटलग्राउंड' है।

2027 में भाजपा को यहां 'मैनेजमेंट' का चुनाव लड़ना होगा। अगर सपा ने यादव-मुस्लिम के साथ दलितों का एक हिस्सा भी जोड़ लिया, तो यह सीट पलट सकती है। यहां स्थानीय उम्मीदवार की छवि पार्टी सिंबल से ज्यादा भारी पड़ती है।

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बीकापुर विधानसभा की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ पढ़ें।

विस्तृत रिपोर्ट: बीकापुर का जातिगत गणित और चुनावी इतिहास

4. अयोध्या सदर (275): वीआईपी सीट का बदला हुआ मिज़ाज

राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या सदर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। 2022 में वेद प्रकाश गुप्ता (भाजपा) ने पवन पांडेय (सपा) को हराया, लेकिन मुकाबला एकतरफा नहीं था। अब अयोध्या का वोटर केवल 'मंदिर' पर नहीं, बल्कि 'रोजगार और सुविधाओं' पर भी सवाल पूछ रहा है।

2027 का परिदृश्य: शहरी बनिया और ब्राह्मण वोट भाजपा का कोर है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में नाराजगी दिखती है। सपा के पवन पांडेय का आक्रामक प्रचार और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ उन्हें मजबूत बनाती है। 2027 में यहां 'राम के नाम' के साथ 'काम के दाम' की भी परीक्षा होगी।

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अयोध्या सदर सीट का विस्तृत चुनावी विश्लेषण पढ़ें।

विस्तृत रिपोर्ट: अयोध्या में वेद प्रकाश vs पवन पांडेय—कौन भारी?

5. रुदौली विधानसभा (271): रामचंद्र यादव का अभेद्य किला?

रुदौली में भाजपा के रामचंद्र यादव ने लगातार दो बार (2017, 2022) जीत दर्ज कर इसे अपना गढ़ बना लिया है। 2022 में उन्होंने सपा के आनंद सेन को लगभग 40,000 वोटों से हराया था, जो उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता दर्शाता है।

लेकिन 2027 में राह आसान नहीं होगी। सपा यहां किसी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो यादव-मुस्लिम के अलावा अति-पिछड़ों को भी साध सके। रुदौली में अगर विपक्ष एकजुट हुआ, तो भाजपा के लिए यह सीट फंस सकती है, क्योंकि यहां मुस्लिम मतदाता भी बड़ी संख्या में decisive रोल निभाते हैं।

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रुदौली विधानसभा सीट का पूरा ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

विस्तृत रिपोर्ट: रुदौली में रामचंद्र यादव का दबदबा और सपा की चुनौती

2027 का फाइनल वर्डिक्ट (निष्कर्ष)

अयोध्या की इन पांचों सीटों का निचोड़ यह है कि 2027 का चुनाव 'लहर' पर नहीं, बल्कि 'जमीनी हकीकत' पर लड़ा जाएगा। गोसाईगंज और मिल्कीपुर में उम्मीदवार का चेहरा, बीकापुर में सोशल इंजीनियरिंग, अयोध्या में विकास और रुदौली में व्यक्तिगत पकड़ ही जीत की चाबी होगी। सभी दलों के लिए यह चुनाव करो या मरो का होगा।

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