भारत सरकार 2026 में ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू करने की तैयारी में। जानें फायदे, विपक्ष की आपत्तियाँ, यूपी 2027 पर असर और राजनीतिक बदलाव।
भारत सरकार ने 2026 की शुरुआत में अपने सबसे महत्वाकांक्षी चुनावी एजेंडे ‘एक देश, एक चुनाव’ को लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। केंद्र सरकार संसद के आगामी सत्र में इसे लेकर संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। इस कदम का मकसद पूरे देश में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है।
क्या है ‘एक देश, एक चुनाव’?
वर्तमान व्यवस्था में भारत में हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं। ‘एक देश, एक चुनाव’ का मतलब है कि सारी राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव एक ही समय पर कराए जाएं।
कोविंद समिति की सिफारिशें और रोडमैप
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति ने 2024 में अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिए थे। 2026 में सरकार इन सिफारिशों पर कदम उठा रही है:
- **चरणबद्ध कार्यान्वयन:** पहले चरण में लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव एक साथ।
- **स्थानीय निकाय और पंचायत:** दूसरे चरण में विधानसभा चुनावों के 100 दिन के भीतर नगर निकाय और पंचायत चुनाव कराने का प्रस्ताव।
- **संविधान संशोधन:** इसके लिए अनुच्छेद 83, 85, 172 और 174 में बदलाव करना आवश्यक होगा।
इसके पक्ष में तर्क
- **खर्च में कटौती:** वर्तमान में बार-बार चुनाव कराने से सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता है। एक साथ चुनाव होने से सुरक्षा बलों, चुनाव आयोग और अन्य संसाधनों पर खर्च बचता है।
- **नीतिगत निरंतरता:** बार-बार ‘आचार संहिता’ लगने के कारण विकास कार्य रुक जाते हैं। एक साथ चुनाव से सरकार को बिना रुकावट काम करने का समय मिलेगा।
- **वोटर टर्नआउट में सुधार:** विशेषज्ञ मानते हैं कि एक साथ चुनाव होने पर मतदान प्रतिशत बढ़ सकता है।
विपक्ष की आपत्तियाँ और चुनौतियां
- **क्षेत्रीय दलों को नुकसान:** विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय मुद्दों के सामने स्थानीय मुद्दे दब सकते हैं।
- **संवैधानिक ढांचा:** कई राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल समय से पहले खत्म करना या बढ़ाना होगा, जिसे विपक्ष संघीय ढांचे पर हमला मान रहा है।
- **संसाधनों की चुनौती:** एक साथ चुनाव के लिए लाखों की संख्या में नई EVM और VVPAT मशीनों की आवश्यकता होगी।
2026-2027 की राजनीति पर असर
- **पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल चुनाव:** 2026 में होने वाले इन राज्य चुनावों को ‘लिटमस टेस्ट’ माना जा रहा है।
- **2029 का लक्ष्य:** सरकार का लक्ष्य है कि 2029 में लोकसभा चुनाव पूरे देश में एक साथ आयोजित हों।
- **उत्तर प्रदेश 2027:** यदि यह योजना लागू होती है, तो यूपी के 2027 विधानसभा चुनावों का कार्यकाल 2029 के साथ समायोजित किया जा सकता है।
जनता और प्रशासन पर प्रभाव
- बार-बार चुनाव से सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर रोक लगती है। ‘एक देश, एक चुनाव’ से प्रशासन को स्थिरता और योजना‑अनुकूल कार्य करने का अवसर मिलेगा।
- मतदाताओं के लिए यह बदलाव मतदाता जागरूकता और मतदान प्रक्रिया में सहजता ला सकता है।
- विपक्ष का तर्क है कि स्थानीय मुद्दे और छोटे राज्यों की राजनीतिक आवाज कमजोर हो सकती है।
निष्कर्ष
‘एक देश, एक चुनाव’ भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा चुनावी सुधार हो सकता है। भाजपा इसे ‘सुशासन’ और विकास की दिशा में कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा मान रहा है। 2026 का साल ऐतिहासिक साबित होगा, क्योंकि इसी वर्ष इस कानून की दिशा तय होगी।
**नोट:** आधिकारिक जानकारी के लिए भारत सरकार के राजपत्र (Gazette of India) और कानून मंत्रालय की वेबसाइट देखें।






