बसपा का सियासी दायरा लगातार सिमट रहा है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की यूपी विधानसभा और संसद में घटती राजनीतिक मौजूदगी की तथ्यात्मक रिपोर्ट।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक निर्णायक भूमिका निभाने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) का राजनीतिक आधार लगातार कमजोर होता नजर आ रहा है। मौजूदा हालात में बसपा का सियासी दायरा विधानसभा से लेकर संसद तक सिमटता दिखाई दे रहा है।

यूपी विधानसभा में सीमित प्रतिनिधित्व
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय बहुजन समाज पार्टी का केवल एक विधायक है, जबकि विधान परिषद में पार्टी का कोई भी सदस्य नहीं है। यह स्थिति उस दल के लिए अहम मानी जा रही है, जिसने कभी प्रदेश की सत्ता की राजनीति को दिशा दी थी।
संसद में भी कमजोर होती पकड़
संसद में भी bahujan samaj party BSP की स्थिति पहले जैसी नहीं रही है। लोकसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व सीमित है और उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार 2026 में राज्यसभा के मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उच्च सदन में पार्टी का कोई भी सांसद नहीं रहेगा।
यह स्थिति क्यों अहम है
राज्यसभा में मौजूदगी किसी भी राजनीतिक दल के लिए नीतिगत बहसों और कानून निर्माण की प्रक्रिया में भागीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। बसपा का सियासी दायरा सिमटने से पार्टी के मुद्दों और पारंपरिक समर्थक वर्ग की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर कमजोर पड़ सकती है।
जमीनी राजनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधानसभा और संसद में कमजोर उपस्थिति का असर संगठनात्मक मजबूती और जमीनी राजनीति पर पड़ता है। इसका प्रभाव कार्यकर्ताओं की सक्रियता और राजनीतिक संवाद में भी दिखाई देता है।
बसपा का इतिहास और स्थापना
बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कांशीराम द्वारा सामाजिक न्याय और बहुजन राजनीति की विचारधारा के साथ की गई थी। पार्टी ने लंबे समय तक दलित और पिछड़े वर्गों को राजनीतिक मंच प्रदान किया।
आगे की राह
कुल मिलाकर, उपलब्ध तथ्य संकेत देते हैं कि बहुजन समाज पार्टी इस समय अपने सबसे चुनौतीपूर्ण राजनीतिक दौर से गुजर रही है। आने वाले समय में संगठनात्मक रणनीति यह तय करेगी कि बसपा का सियासी दायरा किस दिशा में आगे बढ़ता है।






