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‘मुन्ना’ से सत्ता के केंद्र तक: नीतीश कुमार का राजनीतिक और सार्वजनिक सफर
बायोग्राफी23 दिसंबर 2025

‘मुन्ना’ से सत्ता के केंद्र तक: नीतीश कुमार का राजनीतिक और सार्वजनिक सफर

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बख्तियारपुर से शुरू हुआ नीतीश कुमार का सफर कैसे बिहार की सत्ता तक पहुंचा। छात्र आंदोलन, संसद, केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री के रूप में उनकी सार्वजनिक भूमिका पर तथ्यात्मक रिपोर्ट।

‘मुन्ना’ से सत्ता के केंद्र तक: नीतीश कुमार का राजनीतिक और सार्वजनिक सफर

क्यों प्रासंगिक हैं नीतीश कुमार आज

2025 के राजनीतिक परिदृश्य में नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं जिनका नाम केवल सत्ता परिवर्तन से नहीं, बल्कि लंबे प्रशासनिक अनुभव, नीति निरंतरता और शासन की शैली से जुड़ा रहा है। लगभग पाँच दशकों से अधिक समय से सक्रिय सार्वजनिक जीवन, छात्र आंदोलनों से लेकर केंद्र सरकार और फिर बिहार के मुख्यमंत्री पद तक की जिम्मेदारियां—उनके राजनीतिक सफर को समकालीन बिहार की राजनीति का एक अहम दस्तावेज बनाती हैं।

आज भी जब बिहार विकास, सामाजिक न्याय और राजनीतिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा में रहता है, तब नीतीश कुमार की भूमिका केवल अतीत नहीं बल्कि वर्तमान संदर्भों से भी जुड़ी मानी जाती है।

बख्तियारपुर की जमीन से शुरुआत

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ। यह इलाका लंबे समय से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और साधारण ग्रामीण जीवन के लिए जाना जाता है।

पिता कविराज राम लखन सिंह आयुर्वेदिक चिकित्सक थे और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे, ऐसा स्थानीय स्तर पर प्रचलित दस्तावेजों और स्मृतियों में उल्लेख मिलता है।

माता परमेश्वरी देवी गृहिणी थीं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बीच परिवार को संभाला।

बचपन में नीतीश कुमार को घर और मोहल्ले में “मुन्ना” कहकर पुकारा जाता था। ग्रामीण जीवन, पंचायत व्यवस्था, खेती-किसानी और आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याएं उनके शुरुआती अनुभवों का हिस्सा रहीं। बाद के वर्षों में उनकी राजनीति में गांव, सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जैसे मुद्दों पर दिखने वाला फोकस इसी सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़ा माना जाता है।

शिक्षा और तकनीकी पृष्ठभूमि

नीतीश कुमार ने प्रारंभिक शिक्षा बख्तियारपुर के स्थानीय विद्यालयों से प्राप्त की।

माध्यमिक शिक्षा गणेश हाई स्कूल से पूरी करने के बाद उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पटना (वर्तमान एनआईटी पटना) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान वे केवल अकादमिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहे। कॉलेज परिसर में होने वाली छात्र चर्चाओं, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय राजनीति पर चल रही बहसों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही।

डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक बिहार राज्य विद्युत बोर्ड में कार्य किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारियों के अनुसार तकनीकी सेवा में उनका रुझान स्थायी नहीं रहा और सार्वजनिक जीवन की ओर उनका झुकाव लगातार बढ़ता गया।

1970 का दशक: छात्र आंदोलन और राजनीतिक चेतना

नीतीश कुमार के सार्वजनिक जीवन का निर्णायक दौर 1970 का दशक माना जाता है।

1974 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन, जिसका नेतृत्व जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने किया, ने उनकी राजनीतिक सोच को स्पष्ट दिशा दी। यह आंदोलन बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर देशव्यापी असंतोष का प्रतीक बना।

आपातकाल (1975–77) के दौरान जेल जाना उनके लिए केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि लोकतंत्र और सत्ता के संबंध को समझने की एक गहरी प्रक्रिया साबित हुआ।

बाद के वर्षों में प्रशासनिक जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और संस्थागत ढांचे पर उनका जो जोर दिखाई देता है, उसकी वैचारिक नींव इसी दौर में रखी गई मानी जाती है।

चुनावी राजनीति में शुरुआती संघर्ष

नीतीश कुमार ने 1977 और 1980 में हरनौत विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली।

इन शुरुआती असफलताओं के बावजूद वे संगठनात्मक राजनीति से जुड़े रहे और जमीनी स्तर पर सक्रिय बने रहे।

1985 में हरनौत से विधायक बनने के बाद वे बिहार की मुख्यधारा की राजनीति में मजबूती से स्थापित हुए।

यह वह समय था जब बिहार की राजनीति सामाजिक न्याय, मंडल राजनीति और विकास के सवालों के बीच नया आकार ले रही थी। नीतीश कुमार इन विमर्शों का हिस्सा बने और धीरे-धीरे प्रशासनिक और नीतिगत मुद्दों पर उनकी पहचान बनने लगी।

संसद तक पहुंच और राष्ट्रीय भूमिका

1989 में बाढ़ लोकसभा सीट से जीत के साथ नीतीश कुमार संसद पहुंचे।

वी.पी. सिंह सरकार में उन्हें कृषि और सहकारिता राज्य मंत्री बनाया गया। इस भूमिका में उनका ध्यान ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सहकारी संस्थाओं और किसानों से जुड़े विषयों पर रहा।

1990 के दशक में उन्होंने समता पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई। यह दल बाद में बिहार की गठबंधन राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरा।

यह दौर राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधनों के उभार का था, जिसमें क्षेत्रीय नेताओं की भूमिका लगातार बढ़ रही थी।

केंद्र सरकार में मंत्री और सार्वजनिक जवाबदेही

1998 से 2004 के बीच नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार में रेल मंत्री और सतह परिवहन मंत्री के रूप में कार्य किया।

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरान:

  • कई रेल मार्गों पर यात्री सुविधाओं में विस्तार
  • क्षेत्रीय और आंचलिक रेल संपर्क पर ध्यान
  • राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क परियोजनाओं पर काम

1999 के गैसल रेल हादसे के बाद दिया गया उनका इस्तीफा सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और नैतिकता के उदाहरण के रूप में अक्सर उल्लेखित किया जाता है। इस फैसले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण सामने आए, लेकिन इसे भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखा जाता है।

मुख्यमंत्री बनने का रास्ता

नीतीश कुमार मार्च 2000 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, हालांकि यह सरकार अल्पकालिक रही।

इसके बाद 2005 में उनके नेतृत्व में बनी सरकार को बिहार की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा गया।

2005–2010: कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक बदलाव

इस चरण में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता पर विशेष ध्यान दिया गया।

  • कई जिलों में सड़क नेटवर्क का विस्तार
  • पुलिस और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव
  • विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर

सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार इस अवधि में राज्य में बुनियादी ढांचे की स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया गया।

2010–2015: बुनियादी ढांचा और सामाजिक विस्तार

इस दौर में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं पर फोकस रहा।

  • स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में वृद्धि
  • स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयास
  • पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण और सामाजिक भागीदारी

इन पहलों का असर ग्रामीण इलाकों में सामाजिक बदलाव के रूप में देखा गया।

2015–2020: शासन की निरंतरता

इस चरण में सामाजिक कल्याण योजनाओं और प्रशासनिक निरंतरता पर जोर दिया गया।

  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पहुंच में विस्तार
  • ग्रामीण सड़कों और संपर्क मार्गों का विकास
  • शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं का स्थिरीकरण

इन नीतियों को लेकर समर्थन और आलोचना—दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं समय-समय पर सामने आती रहीं।

2020 के बाद: बदलते राजनीतिक समीकरण

2020 के बाद बिहार की राजनीति में गठबंधन और समीकरणों में बदलाव देखने को मिला।

इन परिस्थितियों में भी नीतीश कुमार की भूमिका सत्ता और प्रशासन में बनी रही। उनके फैसलों को कभी व्यावहारिक राजनीति से जोड़ा गया, तो कभी प्रशासनिक अनुभव से।

वर्तमान भूमिका और सार्वजनिक महत्व

नीतीश कुमार वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, महिला सशक्तिकरण और रोजगार जैसे मुद्दे उनके प्रशासनिक एजेंडे में शामिल रहे हैं।

बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के बीच उनकी नीतियों और फैसलों पर सार्वजनिक विमर्श लगातार जारी रहता है।

सूचनात्मक समापन

छात्र आंदोलनों से निकलकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बिहार की आधुनिक राजनीति को समझने का एक महत्वपूर्ण संदर्भ माना जाता है।

उनका सार्वजनिक जीवन केवल व्यक्तिगत यात्रा नहीं, बल्कि राज्य की बदलती सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक संरचना का भी प्रतिबिंब है।

FAQ

नीतीश कुमार कौन हैं और वे क्यों महत्वपूर्ण माने जाते हैं?

नीतीश कुमार बिहार के वरिष्ठ राजनेता हैं, जो छात्र आंदोलन की राजनीति से निकलकर कई बार मुख्यमंत्री बने। उनका महत्व लंबे प्रशासनिक अनुभव, शासन की निरंतरता और बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका के कारण माना जाता है।

नीतीश कुमार का जन्म कब और कहां हुआ था?

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था।

नीतीश कुमार की शैक्षणिक योग्यता क्या है?

उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पटना (वर्तमान NIT पटना) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है।

नीतीश कुमार का राजनीति में प्रवेश कैसे हुआ?

1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से जुड़कर उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। आपातकाल के दौरान जेल जाना भी उनके राजनीतिक अनुभव का हिस्सा रहा।

नीतीश कुमार पहली बार कब विधायक और सांसद बने?

वे 1985 में हरनौत से विधायक बने और 1989 में बाढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।

नीतीश कुमार कितनी बार बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं?

नीतीश कुमार अब तक कई कार्यकालों में बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जिसमें 2000, 2005 के बाद के लगातार कार्यकाल और 2020 के बाद का दौर शामिल है।

मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की प्रमुख प्राथमिकताएं क्या रही हैं?

उनकी प्राथमिकताओं में कानून-व्यवस्था, सड़क और बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक योजनाएं प्रमुख रही हैं।

केंद्र सरकार में नीतीश कुमार ने कौन-कौन से पद संभाले हैं?

वे केंद्र सरकार में रेल मंत्री, सतह परिवहन मंत्री और कृषि एवं सहकारिता राज्य मंत्री जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं।

गैसल रेल हादसे के बाद नीतीश कुमार के इस्तीफे को कैसे देखा जाता है?

1999 के गैसल रेल हादसे के बाद उनका इस्तीफा भारतीय राजनीति में नैतिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक जवाबदेही के उदाहरण के रूप में अक्सर उल्लेखित किया जाता है।

नीतीश कुमार को ‘सुशासन’ से क्यों जोड़ा जाता है?

2005 के बाद उनके कार्यकाल में प्रशासनिक सक्रियता, कानून-व्यवस्था में सुधार और योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर के कारण उन्हें सुशासन की राजनीति से जोड़ा गया।

बदलते राजनीतिक गठबंधनों में नीतीश कुमार की भूमिका क्या रही है?

बिहार की गठबंधन राजनीति में नीतीश कुमार को रणनीतिक और संतुलनकारी नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में सरकार का नेतृत्व किया।

आज के संदर्भ में नीतीश कुमार की राजनीतिक प्रासंगिकता क्या है?

आज भी वे बिहार की राजनीति में एक अनुभवी प्रशासक और निर्णायक नेतृत्वकर्ता माने जाते हैं, जिनके फैसले राज्य की दिशा और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करते हैं।

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