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कोडीन कफ सिरप पर विधानसभा में सवालों का दबाव, मुख्यमंत्री योगी ने दी सफाई, विपक्ष ने मांगी जवाबदेही
अवध की बात25 दिसंबर 2025

कोडीन कफ सिरप पर विधानसभा में सवालों का दबाव, मुख्यमंत्री योगी ने दी सफाई, विपक्ष ने मांगी जवाबदेही

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Chief Editor

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उत्तर प्रदेश विधानसभा में कोडीन कफ सिरप को लेकर सवालों का दबाव बढ़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में सफाई दी, विपक्ष ने प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए।

कोडीन कफ सिरप पर विधानसभा में सवालों का दबाव, मुख्यमंत्री योगी ने दी सफाई

लखनऊ। कोडीन युक्त कफ सिरप को लेकर विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपेक्षाकृत संयमित और रक्षात्मक नजर आए। विपक्ष के तीखे सवालों के बीच उन्होंने सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की, लेकिन सत्ता पक्ष की बेंचों पर आमतौर पर दिखने वाला जोश और तालियां नजर नहीं आईं।

विपक्ष के आरोप, मुख्यमंत्री की सफाई

सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप से किसी भी प्रकार की मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रकरण नकली दवाओं से नहीं, बल्कि अवैध डायवर्जन से जुड़ा हुआ है।

“यह मामला नकली दवाओं का नहीं, बल्कि अवैध डायवर्जन से जुड़ा है और इस पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।”

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस विषय पर उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट में अपना पक्ष रख चुकी है और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई जारी है।

उत्पादन नहीं, स्टॉक और सप्लाई का प्रदेश

मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप का उत्पादन नहीं होता। प्रदेश में केवल इसके स्टॉकिस्ट और होलसेलर हैं, जबकि इसका उत्पादन मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में होता है।

योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि जिन राज्यों में मौत के मामले सामने आए हैं, वे अन्य राज्यों में निर्मित सिरप से जुड़े हैं। इस क्रम में उन्होंने तमिलनाडु में बने सिरप से संबंधित मामलों का उल्लेख किया।

सत्ता पक्ष में खामोशी, विपक्ष हमलावर

मुख्यमंत्री के विस्तृत स्पष्टीकरण के बावजूद सत्ता पक्ष की बेंचों पर खामोशी बनी रही। विपक्ष ने सरकार की सफाई को पर्याप्त नहीं बताते हुए सवाल उठाया कि यदि अवैध डायवर्जन लंबे समय से चल रहा था, तो ड्रग कंट्रोल, आबकारी और पुलिस तंत्र की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी।

क्यों अहम है यह मामला

कोडीन कफ सिरप से जुड़ा यह विवाद अब केवल स्वास्थ्य या कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक निगरानी, नियामक तंत्र की प्रभावशीलता और राजनीतिक जवाबदेही से भी जुड़ता जा रहा है।

सरकार जहां कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया का हवाला देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही है, वहीं विपक्ष प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की मांग पर कायम है। कोडीन कफ सिरप से जुड़ा यह मामला प्रदेश की राजनीति में एक अहम बहस के रूप में उभरता नजर आ रहा है।