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सुल्तानपुर जिला: 2022 से 2027 तक की राजनीतिक समीक्षा
अवध की बात2 जनवरी 2026

सुल्तानपुर जिला: 2022 से 2027 तक की राजनीतिक समीक्षा

Chief Editor

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सुल्तानपुर जिला 2022 से 2027 तक की राजनीतिक स्थिति: सीट-वार विश्लेषण, वोट प्रतिशत, PDA गठबंधन, स्थानीय नेताओं का प्रभाव, और आगामी विधानसभा चुनाव के रुझान।

सुल्तानपुर जिला: 2022 से 2027 तक की राजनीतिक समीक्षा

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में राजनीतिक समीकरण 2022 से लेकर अब तक सिर्फ़ वोट प्रतिशत का खेल नहीं रहे। स्थानीय विवाद, प्रशासनिक काम, विकास‑विरोध, बयानबाज़ी और सामाजिक मुद्दों ने मिलकर 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय की है।

1. इसौली (187): प्रभावशाली स्थानीय नेताओं का क्षेत्र और सहानुभूति का असर

मुसलमान और यादव वोट सपा का मजबूत आधार रहे। ठाकुर और कुछ OBC वोट भाजपा की तरफ झुके।

  • सोनू‑मोनू फैक्टर: चंद्र भद्र सिंह (सोनू) और यश भद्र सिंह (मोनू) प्रभावशाली स्थानीय नेता हैं। 2024 लोकसभा में इन्होंने सपा का समर्थन किया।
  • इंद्रभद्र सिंह मूर्ति विवाद: अक्टूबर–नवंबर 2025 में भाजपा विधायक ने मूर्ति हटाने के लिए पत्र लिखा। प्रशासनिक कदम उठाए गए, हाईकोर्ट ने जवाब मांगा।
  • सहानुभूति वोट: कुछ मतदाता पूर्व विवादों के कारण सपा के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

सपा यहाँ सबसे प्रबल दावेदार लग रही है। यदि भाजपा उम्मीदवार बदलती है या छोटे दलों को साधती है, तो मुकाबला कड़ा होगा। स्थानीय वोट अब नेताओं की स्वीकार्यता और मतदाताओं की भावना पर तय होंगे।

2. सुल्तानपुर शहर (188): शहरी वोटों की जंग और व्यापारियों का असर

शहरी मतदाता निर्णायक हैं। जातीय समीकरण: ठाकुर और ब्राह्मण वोट भाजपा के साथ मजबूत, मुसलमान और OBC का कुछ समर्थन सपा को। स्थानीय मुद्दे जैसे बिजली कटौती, ट्रैफिक, बाजार व्यवस्था सीधे वोट को प्रभावित करते हैं।

अगर सपा PDA/पिछड़ा‑दलित‑मुस्लिम गठबंधन को शहर में साध ले, तो भाजपा की पकड़ कमजोर हो सकती है। यह सीट हमेशा कम मार्जिन वाली रही है।

3. सुल्तानपुर सदर (189): PDA का प्रभाव और पिछड़ा‑दलित गठबंधन

पिछड़ा वर्ग (निषाद, यादव) और दलित मतदाता निर्णायक हैं। PDA + सोनू‑मोनू का असर और गठबंधन सपा को बढ़त दे सकता है। भाजपा को स्थानीय संगठन और सरकारी विकास कार्यों पर जोर देना होगा।

4. लम्भुआ (190): ब्राह्मण‑ओबीसी समीकरण और स्थानीय नाराज़गी

ब्राह्मण + OBC वोट जीत का प्रमुख समीकरण हैं। स्थानीय नाराज़गी, सिंचाई, सड़क, बिजली आपूर्ति और पंचायत‑स्तर के विकास कार्य महत्वपूर्ण हैं। त्रिकोणीय मुकाबला संभव है अगर बसपा ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे।

5. कादीपुर (191 – SC सुरक्षित): दलित मतदाता और संवैधानिक मुद्दे

सीट SC के लिए आरक्षित है; दलित मतदाता सबसे बड़ा समूह हैं। PDA/दलित‑मुस्लिम‑यादव गठबंधन बरकरार रहा, तो सपा के लिए स्थिति मजबूत। भाजपा को SC‑केन्द्रित योजनाओं और सकारात्मक संदेश पर जोर देना होगा।

निष्कर्ष: 2027 में सुल्तानपुर का नया सियासी दौर

2022 में भाजपा ने 5 में से 4 सीटें जीतीं, लेकिन कम मार्जिन (इसौली 269, शहर 1,009) खतरे की घंटी हैं। 2024 की सपा जीत ने PDA को साबित किया। सोनू‑मोनू का सपा से जुड़ना ठाकुरों को साध रहा है, बसपा का गिरता ग्राफ सपा को फायदा दे रहा है। भाजपा की संगठन शक्ति और योगी‑मोदी फैक्टर बाज़ी पलट सकता है, लेकिन अंदरूनी खींचतान नुकसान पहुंचा सकती है। सुल्तानपुर की राजनीति जटिल और बदलती रहती है।

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राम नरेश तिवारी, स्थानीय पत्रकार