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फोरलेन तैयार, लेकिन 100 मीटर बना सबसे बड़ी बाधा: गोसाईगंज बाईपास में मुआवजे को लेकर टकराव
अवध की बात25 दिसंबर 2025

फोरलेन तैयार, लेकिन 100 मीटर बना सबसे बड़ी बाधा: गोसाईगंज बाईपास में मुआवजे को लेकर टकराव

Chief Editor

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अयोध्या के गोसाईगंज में फोरलेन बाईपास लगभग तैयार है, लेकिन 100 मीटर के हिस्से पर मुआवजा विवाद के चलते यातायात शुरू नहीं हो पाया। जानिए पूरा मामला।

गोसाईगंज/अयोध्या। अयोध्या जिले के गोसाईगंज क्षेत्र में निर्माणाधीन फोरलेन बाईपास परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है। सड़क की सतह तैयार है और अधिकांश हिस्सों में यातायात शुरू होने की स्थिति बन गई है, लेकिन भीटी रोड स्थित हनुमानगढ़ी के सामने करीब 100 से 150 मीटर का हिस्सा पूरे प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है।

यह छोटा सा हिस्सा न केवल बाईपास के संचालन में देरी का कारण बन रहा है, बल्कि मुआवजे को लेकर प्रशासन और प्रभावित परिवार के बीच असहमति का केंद्र भी बना हुआ है।

प्रभावित परिवार का पक्ष

इस मामले में जितेंद्र जायसवाल का कहना है कि विवादित हिस्से में उनकी साइकिल की दुकान और आवासीय मकान स्थित है। उनका दावा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि उचित मुआवजा दिए बिना किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जा सकती।

प्रभावित परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें न तो मुआवजा मिला है और न ही कोई लिखित सूचना दी गई है। उनका यह भी आरोप है कि 16 दिसंबर को लोक निर्माण विभाग के अधिकारी उनके घर पहुंचे और कानूनी स्थिति को लेकर बातचीत की, जिससे वे मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं।

लोक निर्माण विभाग का पक्ष

वहीं, लोक निर्माण विभाग का कहना है कि गोसाईगंज बाईपास परियोजना में 100 से अधिक प्रभावित लोगों को नियमों के तहत मुआवजा दिया जा चुका है और सभी ने इसे स्वीकार किया है। विभाग के अनुसार, इस मार्ग में आने वाले एक धार्मिक स्थल को भी आपसी सहमति से स्थानांतरित किया गया है।

विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि मुआवजा किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत अपेक्षा के अनुसार नहीं, बल्कि सरकार द्वारा तय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार दिया जाता है। इस पूरे प्रकरण की जानकारी जिला प्रशासन को भी उपलब्ध करा दी गई है।

तैयार सड़क, लेकिन रुका यातायात

स्थिति यह है कि बाईपास का अधिकांश हिस्सा बनकर तैयार है, लेकिन विवादित 100 मीटर के कारण पूरे मार्ग पर यातायात शुरू नहीं हो पा रहा है। एक ओर अधिकारी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों में उलझे हैं, तो दूसरी ओर प्रभावित परिवार न्यायालय के आदेशों का हवाला दे रहा है।

स्थानीय स्तर पर बढ़ती चर्चा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया, कानूनी आदेश और विभागीय नियमों के बीच संतुलन की परीक्षा बन चुका है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि गोसाईगंज का यह बाईपास अब केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि समाधान की प्रतीक्षा करता एक जटिल मुद्दा बन गया है।