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कोयले की धूल से पूर्वांचल की राजनीति तक: ओम प्रकाश राजभर की जीवन यात्रा
बायोग्राफी24 दिसंबर 2025

कोयले की धूल से पूर्वांचल की राजनीति तक: ओम प्रकाश राजभर की जीवन यात्रा

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ओम प्रकाश राजभर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक राजनीति से होकर सत्ता तक पहुँचा। जानिए पूर्वांचल से यूपी सरकार तक का पूरा सफर।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ नेता ऐसे भी हैं जिनकी कहानी केवल सत्ता तक पहुँचने की नहीं, बल्कि जमीनी संघर्ष, सामाजिक सक्रियता और स्थानीय जनसंपर्क से जुड़ी होती है। ओम प्रकाश राजभर, जिन्हें उत्तर प्रदेश में एक प्रभावशाली और जनप्रिय नेता के रूप में जाना जाता है, ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं। उनका जीवन संघर्ष और राजनीतिक सफर पूर्वांचल की वास्तविकताओं से गहराई से जुड़ा रहा है।

कोयले की खदानों में पिता की मेहनत से लेकर विधानसभा हॉल तक का उनका सफर, उनके व्यक्तित्व और नेतृत्व को एक विशेष आयाम देता है। यह कहानी सिर्फ एक राजनीतिक करियर नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिबद्धता, स्थानीय जनसमूहों के लिए आवाज़ और उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदलाव की यात्रा भी है।

शुरुआती जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

ओम प्रकाश राजभर का जन्म 15 सितंबर 1962 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के फतेहपुर खौंदा गांव में हुआ। उनके परिवार की जड़ें बलिया जिले के रसड़ा ब्लॉक के रामपुर गांव से भी जुड़ी हैं। वे सामाजिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले राजभर समुदाय से आते हैं।

उनके पिता सन्नू राजभर कोयला खदानों में मजदूरी करते थे, जिससे परिवार को आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ता था। परिवार का यह संघर्ष और ग्रामीण परिवेश ने छोटे ओम प्रकाश में आत्मनिर्भरता, मेहनत और सामाजिक समझ विकसित की।

Anecdote: बचपन में ओम प्रकाश अक्सर अपने पिता के साथ खदानों और खेतों में काम करते और रात में पढ़ाई करते थे। कभी-कभी वे स्थानीय मंडियों में उपज बेचने में भी मदद करते। इन अनुभवों ने उन्हें मेहनत का महत्व और आम लोगों की समस्याओं की गहरी समझ दी।

सामाजिक माहौल का प्रभाव

पूर्वांचल का सामाजिक माहौल उनके दृष्टिकोण पर गहरा प्रभाव डालता रहा। गाँव के स्तर पर जातिगत विभाजन, आर्थिक असमानता और ग्रामीण शिक्षा की चुनौतियाँ उनके अनुभव का हिस्सा थीं। इन परिस्थितियों ने उन्हें यह समझने में मदद की कि समाज में बदलाव केवल राजनीतिक भागीदारी के माध्यम से ही संभव है।

शिक्षा और वैचारिक विकास

शैक्षणिक यात्रा आर्थिक चुनौतियों के बीच आगे बढ़ी। उन्होंने वाराणसी के बड़ागांव स्थित बलदेव डिग्री कॉलेज से 1983 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और वहीं से राजनीति विज्ञान में परास्नातक किया।

शिक्षा के दौरान संसाधनों की कमी लगातार सामने आती रही। उन्होंने खेती, मंडियों में उपज बेचने और ऑटो-रिक्शा चलाने जैसे काम किए, जिससे उन्हें व्यावहारिक जीवन और समाज की वास्तविकताओं का अनुभव मिला।

Anecdote: कॉलेज में एक बार ओम प्रकाश ने ग्रामीण विद्यार्थियों की समस्याओं पर एक व्याख्यान आयोजित किया, जिसमें स्थानीय नेताओं और समाज सेवियों ने हिस्सा लिया। यह पहला अवसर था जब उन्होंने सामाजिक सक्रियता और राजनीतिक नेतृत्व का अनुभव किया।

इन परिस्थितियों ने उनके व्यक्तित्व और राजनीति के दृष्टिकोण को आकार दिया। शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक चेतना विकसित करने का माध्यम बनी।

सामाजिक सक्रियता से राजनीतिक मंच तक

ओम प्रकाश राजभर की राजनीति की नींव उनके सामाजिक सक्रियता और रोज़मर्रा की ज़मीनी समस्याओं से जुड़ी रही। खेती, स्वरोज़गार और ग्रामीण जीवन से जुड़े रहने के कारण उनका जनता से सीधा जुड़ाव रहा।

1990 के शुरुआती वर्षों में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ सक्रिय राजनीतिक कार्य शुरू किया। वाराणसी जिले में पार्टी गतिविधियों में भागीदारी और 1991 व 1996 के विधानसभा चुनावों में प्रयासों ने उनके राजनीतिक कौशल को निखारा।

समय के साथ, पार्टी के भीतर मतभेद और दिशा-निर्धारण को लेकर झड़पें सामने आईं। इस संघर्ष ने उन्हें अपनी पार्टी बनाने की प्रेरणा दी।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) का गठन

अक्टूबर 2002 में उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) की स्थापना की। यह पार्टी विशेष रूप से राजभर समुदाय और अन्य पिछड़े वर्गों के राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों को लेकर सक्रिय रही।

एसबीएसपी के गठन के बाद ओम प्रकाश राजभर ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान स्थापित की। उन्होंने गठबंधन रणनीति, चुनावी तैयारी और स्थानीय जनसमूहों के साथ जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित किया।

Timeline of Alliances:

  • 2017: भाजपा के साथ गठबंधन और राज्य सरकार में हिस्सा।
  • 2022: समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी तालमेल।
  • जुलाई 2023: एसबीएसपी की एनडीए में वापसी।
  • मार्च 2024: राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी।

इन रणनीतियों से उनके राजनीतिक सफर में निरंतर गतिशीलता और क्षेत्रीय पहचान बनी रही।

चुनावी सफर और प्रदर्शन

ओम प्रकाश राजभर ने चुनावी राजनीति में हमेशा स्थानीय मुद्दों और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दी। उनके चुनावी प्रदर्शन में कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:

ओम प्रकाश राजभर का चुनावी सफर उनके राजनीतिक कौशल, जनता से जुड़े रहने की क्षमता और स्थानीय मुद्दों पर फोकस का आइना है। उनका पहला बड़ा राजनीतिक कदम 1991 में ज़हूराबाद, गाजीपुर विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर चुनाव लड़ना था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वोट प्रतिशत लगभग 32% रहा। यह हार उनके लिए अनुभव का अवसर साबित हुई, जिसने उन्हें स्थानीय मुद्दों और जनता की प्राथमिकताओं को समझने में मदद की।

1996 में उन्होंने फिर से BSP के माध्यम से चुनाव लड़ा। इस बार वोट प्रतिशत में थोड़ी बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 34% हो गया। यह संकेत था कि उनके प्रति स्थानीय लोगों का विश्वास धीरे-धीरे बन रहा था, लेकिन संगठनात्मक और संसाधनों की सीमाओं के कारण जीत हासिल नहीं हो सकी।

सच्ची राजनीतिक पहचान उनके लिए 2002 में आई, जब उन्होंने अपनी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSPS) का गठन किया। इस नए राजनीतिक प्लेटफॉर्म से उन्होंने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा और पहली बार विधानसभा सीट जीतने में सफल रहे। इस जीत के साथ उनका वोट प्रतिशत 45% तक पहुँच गया। जनता ने उनके स्थानीय विकास, पिछड़े वर्गों के कल्याण और जमीनी समस्याओं पर ध्यान देने को स्वीकार किया।

2007 में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इस बार उनका वोट प्रतिशत बढ़कर 47% हो गया। यह लगातार बढ़ता ग्राफ उनके स्थानीय जनसमर्थन और प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाता था। जनता ने उनके कार्यों और विकास पहलों में निरंतरता को सराहा।

2012 का चुनाव उनके लिए तीसरी बार जीत का अवसर लेकर आया। वोट प्रतिशत इस बार और बढ़कर 49% तक पहुंचा। यह लगातार वृद्धि यह दर्शाती थी कि जनता ने उनके समाज और विकास पर केंद्रित कार्यों को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया।

2017 में ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा नेतृत्व वाले NDA के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रभाव और गठबंधन की ताकत का फायदा उठाया और वोट प्रतिशत 52% तक पहुंच गया। इस जीत ने उन्हें न केवल विधानसभा में स्थिरता दी, बल्कि सत्ता समीकरण में भी मजबूती प्रदान की।

2022 का चुनाव उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। इस बार उन्होंने सपा के साथ गठबंधन किया। स्थानीय समीकरण और गठबंधन की रणनीति के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वोट प्रतिशत घटकर 40% रह गया। यह परिणाम दर्शाता है कि गठबंधन और स्थानीय मुद्दों का संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।

फिर 2023–24 में उनकी NDA में वापसी और रणनीतिक गठबंधन ने उन्हें पुनः जीत दिलाई। इस चुनाव में उनका वोट प्रतिशत 51% रहा। इस जीत में उनका स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों पर फोकस, ग्रामीण और पिछड़े वर्गों के लिए सक्रियता और जनता से सीधे संवाद बनाए रखना मुख्य कारण रहे।

इस पूरी चुनावी यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि ओम प्रकाश राजभर की राजनीति में लोकप्रियता धीरे-धीरे बनी, प्रत्येक हार और जीत से सीख लेकर रणनीति विकसित की गई, और स्थानीय जनता के साथ निरंतर जुड़ाव उनके स्थायित्व की कुंजी रहा। उनका चुनावी सफर यह भी दिखाता है कि राजनीतिक सफलता केवल गठबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास, क्षेत्रीय सक्रियता और स्थानीय मुद्दों पर निरंतर काम करने से आती है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि उन्होंने स्थानीय जनता के विश्वास और गठबंधन रणनीति में निरंतर संतुलन बनाए रखा।

विभागीय काम और प्रशासनिक योगदान

ओम प्रकाश राजभर वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके पास कई महत्वपूर्ण विभाग हैं।

मुख्य विभाग और कार्य:

  • पंचायती राज: ग्रामीण पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम। पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं का ट्रैकिंग सिस्टम।
  • अल्पसंख्यक कल्याण: छात्रवृत्ति योजनाओं का क्रियान्वयन। अल्पसंख्यक युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण केंद्र।
  • मुस्लिम वक्फ और हज: धार्मिक स्थलों का रखरखाव। हज यात्रियों के लिए सुविधाओं का आयोजन।

Media References:

“ओम प्रकाश राजभर ने ज़हूराबाद में पंचायत विकास कार्यों का निरीक्षण किया और स्थानीय समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया।” – Dainik Jagran, 2023

“एसबीएसपी के नेतृत्व में पूर्वांचल में पिछड़े वर्ग की पहचान मजबूत हुई।” – Amar Ujala, 2022

इन विभागीय कार्यों के माध्यम से उनका जनसंपर्क, प्रशासनिक सुधार और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है।

सामाजिक प्रतिनिधित्व और पूर्वांचल में प्रभाव

ओम प्रकाश राजभर ने राजभर समुदाय और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए लगातार काम किया।

मुख्य सामाजिक पहलें:

  • शिक्षा: ग्रामीण स्कूलों में पुस्तक और सामग्री वितरण।
  • स्वास्थ्य: ग्रामीण स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियान।
  • युवा और खेल: स्थानीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन और प्रशिक्षण।
  • सांस्कृतिक विरासत: महाराजा सुहेलदेव की ऐतिहासिक स्मृति को जागरूकता में शामिल करना।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में उनके कार्यों ने सामाजिक और राजनीतिक आधार मजबूत किया और एसबीएसपी को प्रभावी संगठनात्मक शक्ति में बदल दिया।

चुनौतीपूर्ण दौर और नेतृत्व की परीक्षा

राजनीतिक सफर में ओम प्रकाश राजभर ने कई कठिनाइयों का सामना किया:

  • गठबंधन बदलने और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव।
  • आर्थिक और सामाजिक दबाव।
  • स्थानीय और राज्यस्तरीय विवाद।

Anecdote: 2017 के चुनावों के दौरान, गाजीपुर में जब विकास और स्थानीय कल्याण को लेकर विवाद हुआ, तो ओम प्रकाश ने स्वयं पंचायतों का दौरा किया और जनता की समस्याओं को समझा। इसके बाद तत्काल समाधान किए गए।

यह उनकी जमीनी संपर्क और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण है।

चुनावी रणनीति और गठबंधन कला

ओम प्रकाश राजभर की ताकत सिर्फ जनसमर्थन में नहीं, बल्कि गठबंधन और चुनावी रणनीति में भी रही है।

  • एसबीएसपी का गठन उनके नेतृत्व और संगठनात्मक कौशल को दर्शाता है।
  • गठबंधन बदलते राजनीतिक माहौल में लचीलापन और रणनीति की क्षमता।
  • जनता और पार्टी के बीच विश्वास बनाए रखना।

इस रणनीति ने उन्हें पूर्वांचल के प्रमुख राजनीतिक चेहरे के रूप में स्थापित किया।

निष्कर्ष

ओम प्रकाश राजभर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, सामाजिक सक्रियता और राजनीतिक सफर यह दर्शाता है कि पूर्वांचल की जमीनी हकीकतों से लेकर राज्य सरकार तक का रास्ता केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए काम करने की प्रतिबद्धता के माध्यम से तय किया जा सकता है।

उनकी कहानी यह भी बताती है कि कठिन परिस्थितियों, आर्थिक संघर्ष और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद स्थानीय जनसंपर्क, सामाजिक प्रतिबद्धता और नेतृत्व कौशल किसी नेता की पहचान और प्रभाव को मजबूत बना सकते हैं।

ओम प्रकाश राजभर ने अपने जीवन और करियर के माध्यम से यह साबित किया कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं है, बल्कि जनता की सेवा, सामाजिक न्याय और स्थानीय विकास का रास्ता भी है।

ओम प्रकाश राजभर: प्रश्न और उत्तर

ओम प्रकाश राजभर कौन हैं?

ओम प्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेता हैं। वे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSPS) के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और गाजीपुर ज़िले की ज़हूराबाद विधानसभा सीट से विधायक हैं।

ओम प्रकाश राजभर का जन्म कब और कहाँ हुआ?

ओम प्रकाश राजभर का जन्म 15 सितंबर 1962 को वाराणसी ज़िले के फतेहपुर खौंदा गांव में हुआ था।

ओम प्रकाश राजभर का परिवार और सामाजिक पृष्ठभूमि क्या है?

वे राजभर समुदाय से आते हैं। उनके पिता कोयला खदानों में मजदूरी करते थे। उनका बचपन ग्रामीण और मेहनतकश वातावरण में बीता।

ओम प्रकाश राजभर की शिक्षा कहाँ हुई?

उन्होंने बलदेव डिग्री कॉलेज, वाराणसी से स्नातक और राजनीति विज्ञान में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने ऑटो-रिक्शा चलाने और मंडियों में काम करके परिवार का सहयोग किया।

ओम प्रकाश राजभर ने राजनीति में कब कदम रखा?

उनका राजनीतिक सफर 1990 के शुरुआती वर्षों में BSP से शुरू हुआ। 2002 में उन्होंने SBSPS का गठन किया और स्वतंत्र रूप से विधानसभा चुनाव लड़ा।

ओम प्रकाश राजभर कितनी बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं?

वे ज़हूराबाद विधानसभा सीट पर कई बार जीत चुके हैं। प्रमुख जीतें: 2002, 2007, 2012, 2017 और 2023–24 में।

ओम प्रकाश राजभर का चुनावी प्रदर्शन कैसा रहा है?

2002: 45%, 2007: 47%, 2012: 49%, 2017: 52% (NDA), 2023–24: 51% (NDA वापसी)।

ओम प्रकाश राजभर ने कौन-कौन से विभाग संभाले हैं?

वे वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके विभाग हैं: पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज।

ओम प्रकाश राजभर की प्रमुख सामाजिक पहलें क्या हैं?

वे ग्रामीण शिक्षा, स्वास्थ्य शिविर, खेल प्रतियोगिता और युवा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। साथ ही महाराजा सुहेलदेव की ऐतिहासिक स्मृति को जनता तक पहुंचाने में भी योगदान दिया है।

ओम प्रकाश राजभर का राजनीतिक गठबंधन और रणनीति क्या रही?

उनका राजनीतिक गठबंधन समय के अनुसार बदलता रहा। प्रमुख: 2017 (NDA), 2022 (सपा), 2023–24 (NDA वापसी)। उनकी रणनीति में स्थानीय मुद्दों पर ध्यान और जनता से सीधे संवाद शामिल है।

ओम प्रकाश राजभर किस समुदाय के लिए काम करते हैं?

वे मुख्य रूप से राजभर समुदाय और अन्य पिछड़े वर्ग के अधिकारों और कल्याण के लिए काम करते हैं।

ओम प्रकाश राजभर के जीवन संघर्ष के उदाहरण क्या हैं?

कम उम्र में आर्थिक कठिनाइयाँ, ऑटो-रिक्शा और मंडी में काम, शिक्षा के दौरान पारिवारिक जिम्मेदारियाँ—इन अनुभवों ने उन्हें व्यावहारिक राजनीति और जनता के मुद्दों को समझने में मदद की।

ओम प्रकाश राजभर का वर्तमान राजनीतिक प्रभाव क्या है?

वे ज़हूराबाद विधानसभा के विधायक और SBSPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका प्रभाव पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, भदोही और आसपास के जिलों में मजबूत है और वे सामाजिक न्याय और स्थानीय विकास पर केंद्रित रहे हैं।