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प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद क्या बदलेगा प्रशांत किशोर का राजनीतिक रास्ता? बिहार के लिए 10 साल के विज़न पर बड़ा संकेत
राजनीति17 दिसंबर 2025

प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद क्या बदलेगा प्रशांत किशोर का राजनीतिक रास्ता? बिहार के लिए 10 साल के विज़न पर बड़ा संकेत

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Chief Editor

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प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बिहार चुनाव 2025 के बाद 10 साल के विज़न पर बड़ा संकेत।

नई दिल्ली/पटना

चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति की चर्चाओं में हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से उनकी हालिया मुलाकात के बाद यह सवाल तेज हो गया है कि क्या प्रशांत किशोर आने वाले समय में किसी नए राजनीतिक समीकरण की ओर बढ़ रहे हैं।

यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी को उम्मीद के अनुरूप परिणाम नहीं मिले। पार्टी ने बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही। इसके बावजूद प्रशांत किशोर की राजनीतिक सक्रियता बनी हुई है।

बंद कमरे की बैठक से बढ़ी अटकलें

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर के बीच हुई यह मुलाकात लगभग दो घंटे तक चली। बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बातचीत केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें संगठनात्मक सहयोग और आगामी चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विचार हुआ हो सकता है।

पटना में सक्रिय PK, संगठन पर दोबारा मंथन

प्रियंका गांधी से मुलाकात के तुरंत बाद प्रशांत किशोर पटना पहुंच चुके हैं। यहां वे जन सुराज पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और भरोसेमंद सहयोगियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी की पेशेवर टीम और संगठनात्मक ढांचे पर फिर से विचार किया जा रहा है। आने वाले महीनों में जन सुराज पार्टी में संगठनात्मक पुनर्गठन की संभावना जताई जा रही है।

बिहार चुनाव 2025: नतीजों के बाद उठे सवाल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जन सुराज पार्टी के लिए पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा थी। पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन चुनावी नतीजे निराशाजनक रहे। अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई।

हालांकि, प्रशांत किशोर खुद चुनाव मैदान में नहीं उतरे थे, लेकिन चुनाव के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

“हमारा लक्ष्य सिर्फ चुनाव जीतना नहीं है, बल्कि अगले दस वर्षों में बिहार को विकास की दिशा में आगे ले जाना है।”

“अगले 10 साल बिहार के लिए” — बयान का महत्व

हाल ही में एक इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा था कि वे अगले 10 वर्षों तक बिहार के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक बिहार देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल नहीं हो जाता, तब तक उनका प्रयास जारी रहेगा।

कांग्रेस के साथ भविष्य की राजनीति?

प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि प्रशांत किशोर कांग्रेस के साथ मिलकर किसी बड़े राजनीतिक रोडमैप पर काम कर सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी चर्चा है कि उनकी रणनीतिक टीम अन्य राज्यों में कांग्रेस को चुनावी सलाह दे सकती है।

हालांकि, अब तक न तो कांग्रेस और न ही प्रशांत किशोर की ओर से किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि की गई है।

निष्कर्ष

जन सुराज पार्टी की चुनावी हार के बावजूद प्रशांत किशोर पूरी तरह राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। प्रियंका गांधी से मुलाकात, पटना में बैठकों का दौर और 10 साल के विज़न वाला बयान यह संकेत देता है कि आने वाले समय में बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और स्पष्ट हो सकती है।