Republic Day 2026 के लिए Class 6–12 छात्रों हेतु संतुलित, तथ्यात्मक और स्कूल-स्तरीय हिंदी भाषण। असेंबली और मंच कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त।
26 जनवरी 2026 को जब स्कूल के मंच पर एक छात्र माइक संभालता है, तो उसके शब्द केवल कार्यक्रम की औपचारिकता नहीं होते। उस छोटे से भाषण में संविधान की समझ, नागरिक जिम्मेदारी और आज के छात्र की सोच एक साथ दिखाई देती है।
यही कारण है कि गणतंत्र दिवस पर दिया गया भाषण हर साल अलग अर्थ रखता है। यह केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि यह समझने का समय भी होता है कि अधिकार, कर्तव्य और लोकतंत्र छात्रों के रोज़मर्रा के जीवन में कैसे दिखाई देते हैं।
आगे दिया गया भाषण उसी छात्र दृष्टि को सामने रखता है—सरल भाषा में, स्कूल मंच के अनुरूप और बिना किसी अतिशयोक्ति के।
गणतंत्र दिवस 2026: छात्र की दृष्टि से संविधान, नागरिकता और जिम्मेदारी
माननीय प्रधानाचार्य महोदय, आदरणीय शिक्षकगण, और मेरे प्रिय साथियों, आज 26 जनवरी का दिन है। यह दिन हमारे देश के लिए केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं है, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक जीवन की आधारशिला से जुड़ा हुआ दिन है। गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि संविधान और नियमों से चलने वाला देश है।
26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हुआ। इसी दिन हमारे देश ने यह तय किया कि सत्ता किसी व्यक्ति, राजा या समूह के हाथ में नहीं होगी, बल्कि कानून और संविधान सर्वोपरि होंगे। यही गणतंत्र की मूल भावना है।
एक छात्र के रूप में अक्सर हमें लगता है कि संविधान, कानून और लोकतंत्र जैसे विषय अभी हमारे जीवन से दूर हैं। लेकिन यदि हम ध्यान से देखें, तो संविधान का प्रभाव हमारे रोज़मर्रा के जीवन में हर जगह दिखाई देता है।
- स्कूल में हमें समान अवसर मिलते हैं।
- हमें अपनी बात कहने की आज़ादी मिलती है।
- हमें बिना भेदभाव के शिक्षा पाने का अधिकार मिलता है।
ये सभी अधिकार संविधान से ही आते हैं। गणतंत्र दिवस का असली उद्देश्य यही है कि हम इन अधिकारों को केवल जानें ही नहीं, बल्कि उनके पीछे की जिम्मेदारी को भी समझें। क्योंकि अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे से अलग नहीं होते।
संविधान हमें सिखाता है कि सभी नागरिक बराबर हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हम सब एक जैसे हैं, बल्कि इसका अर्थ यह है कि कानून की नज़र में किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह विचार हमें स्कूल जीवन में भी अपनाना चाहिए—चाहे वह दोस्ती हो, टीमवर्क हो या कक्षा का माहौल।
आज का भारत तेजी से बदल रहा है। तकनीक हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है। इंटरनेट, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने हमें बहुत सी सुविधाएँ दी हैं। लेकिन इसके साथ-साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है।
एक जागरूक नागरिक वही होता है जो जानकारी को सोच-समझकर इस्तेमाल करे। गलत सूचना से दूर रहे। और दूसरों की गरिमा का सम्मान करे।
गणतंत्र केवल सरकार की व्यवस्था नहीं है, यह नागरिकों के व्यवहार से बनता है। अगर हम नियमों का पालन नहीं करते, सार्वजनिक संपत्ति का ध्यान नहीं रखते या दूसरों के अधिकारों का सम्मान नहीं करते, तो गणतंत्र कमजोर होता है।
एक छात्र के रूप में हमारा दायित्व यहीं से शुरू होता है। ईमानदारी से पढ़ाई करना, अनुशासन में रहना, समय का सम्मान करना, और अपने आसपास के लोगों के प्रति संवेदनशील रहना—ये सभी छोटी-छोटी बातें मिलकर एक जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करती हैं।
अक्सर यह कहा जाता है कि छात्र देश का भविष्य हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि छात्र देश का वर्तमान भी हैं। आज हम जो सोचते हैं, जो सीखते हैं और जैसा व्यवहार करते हैं, वही आने वाले वर्षों में भारत की दिशा तय करता है।
गणतंत्र दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम अपने आप से यह प्रश्न पूछें—क्या हम अपने अधिकारों को समझते हैं? क्या हम अपने कर्तव्यों के प्रति उतने ही सजग हैं? क्या हम दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं?
संविधान केवल किताबों में पढ़ने की चीज़ नहीं है। वह हमारे आचरण में दिखाई देना चाहिए। जब हम नियमों का पालन करते हैं, जब हम अन्याय के खिलाफ खड़े होते हैं, और जब हम समाज में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं—तब संविधान जीवित रहता है।
आज के समय में, जब विचारों में मतभेद होना सामान्य बात है, तब सहिष्णुता और संवाद का महत्व और बढ़ जाता है। गणतंत्र हमें सिखाता है कि असहमति का मतलब दुश्मनी नहीं होता। अलग विचार होने के बावजूद साथ चलना ही लोकतंत्र की खूबी है।
एक छात्र के रूप में हमें यह समझना होगा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए केवल बड़ी उपलब्धियाँ जरूरी नहीं होतीं। ईमानदारी, अनुशासन और जिम्मेदारी जैसे मूल्य ही किसी भी समाज की असली ताकत होते हैं।
गणतंत्र दिवस पर हम तिरंगे को सलामी देते हैं। यह केवल परंपरा नहीं है। यह उस व्यवस्था के प्रति सम्मान है, जिसने हमें पहचान, अधिकार और अवसर दिए हैं। यदि हम अपने जीवन में संविधान के मूल्यों—समानता, न्याय और स्वतंत्रता—को अपनाएँ, तो यही हमारे गणतंत्र के प्रति सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इन्हीं विचारों के साथ, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। धन्यवाद। जय हिंद।
गणतंत्र दिवस 2026: युवा भारत, लोकतांत्रिक चेतना और जिम्मेदार नागरिकता
माननीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण, और मेरे प्रिय साथियों, आज हम 26 जनवरी को यहाँ एकत्र हुए हैं। यह दिन केवल राष्ट्रीय उत्सव का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम किस तरह के देश में रहना चाहते हैं और उस देश के निर्माण में हमारी भूमिका क्या है।
भारत ने स्वतंत्रता के बाद यह निर्णय लिया कि देश किसी एक व्यक्ति, विचार या समूह की इच्छा से नहीं, बल्कि संविधान द्वारा तय नियमों के अनुसार चलेगा। 26 जनवरी 1950 को इसी सोच को व्यवहारिक रूप दिया गया। तभी से गणतंत्र हमारे सार्वजनिक जीवन की दिशा तय करता आ रहा है।
गणतंत्र का अर्थ केवल चुनाव या सरकारी व्यवस्था नहीं है। इसका सीधा संबंध नागरिकों की सोच, उनके व्यवहार और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी से है। यदि नागरिक सजग हैं, तो लोकतंत्र मजबूत होता है। यदि नागरिक उदासीन हो जाएँ, तो व्यवस्था कमजोर पड़ती है।
एक छात्र के रूप में यह सवाल अक्सर उठता है कि हमारी भूमिका क्या है। हम न तो कानून बनाते हैं और न ही सरकार चलाते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमारी जिम्मेदारी कम है। वास्तव में, नागरिक चेतना की शुरुआत स्कूल से ही होती है।
- स्कूल वह स्थान है जहाँ हम नियमों का अर्थ समझते हैं।
- लाइन में लगना,
- समय का पालन करना,
- और दूसरों की बात सुनना—
- ये सभी लोकतांत्रिक व्यवहार के छोटे लेकिन महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
आज का भारत युवाओं का देश कहा जाता है। बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई, तकनीक, खेल और रचनात्मक क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। यह प्रगति आशा जगाती है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाती है कि क्या हम इस प्रगति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी उतना ही महत्व दे रहे हैं।
गणतंत्र हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी नहीं होता। स्वतंत्रता का सही अर्थ है—जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने की आज़ादी। जब हम दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हुए अपनी बात कहते हैं, तभी लोकतंत्र जीवंत रहता है।
आज सूचना हर जगह उपलब्ध है। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों ने विचार व्यक्त करना आसान बना दिया है। लेकिन इसके साथ यह ज़रूरी हो गया है कि हम तथ्य और अफवाह के बीच अंतर करना सीखें। जिम्मेदार नागरिक वही होता है जो सुनी-सुनाई बातों पर तुरंत विश्वास नहीं करता।
एक छात्र के लिए यह अभ्यास अभी से शुरू होना चाहिए। सोच-समझकर बोलना, सही जानकारी साझा करना, और दूसरों की गरिमा का ध्यान रखना—ये सभी बातें लोकतांत्रिक संस्कार को मजबूत करती हैं।
गणतंत्र दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि देश की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत है। अलग-अलग भाषा, पहनावा और विचार रखने वाले लोग मिलकर भारत को बनाते हैं। सहिष्णुता और आपसी सम्मान के बिना यह विविधता टिक नहीं सकती।
आज के समय में मतभेद होना सामान्य है। लेकिन मतभेद को टकराव में बदलना लोकतांत्रिक सोच के खिलाफ है। गणतंत्र हमें सिखाता है कि संवाद के ज़रिये समाधान निकाला जा सकता है।
एक छात्र के रूप में हमें यह समझना होगा कि जिम्मेदार नागरिक बनने का मतलब केवल बड़े मुद्दों पर बोलना नहीं है। कक्षा में ईमानदारी से काम करना, नकल से दूर रहना, और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना—ये सभी छोटे कदम देश के भविष्य को आकार देते हैं।
अक्सर कहा जाता है कि युवा बदलाव का प्रतीक होते हैं। लेकिन बदलाव तभी सार्थक होता है, जब वह सोच और व्यवहार दोनों में दिखाई दे। गणतंत्र दिवस इसी आत्ममंथन का अवसर देता है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि संविधान ने हमें केवल अधिकार नहीं दिए, बल्कि एक दिशा भी दी है। यह दिशा हमें न्याय, समानता और सहयोग की ओर ले जाती है।
यदि हम आज से ही इन मूल्यों को अपने जीवन में उतारना शुरू कर दें, तो आने वाला भारत अधिक जिम्मेदार, अधिक जागरूक और अधिक संवेदनशील होगा। गणतंत्र केवल सरकारी इमारतों में नहीं रहता। वह कक्षाओं में, खेल के मैदानों में, और हमारे रोज़मर्रा के व्यवहार में दिखाई देता है।
इसी समझ के साथ, गणतंत्र दिवस 2026 पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समान महत्व देंगे। इन्हीं शब्दों के साथ, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। धन्यवाद। जय हिंद।
गणतंत्र दिवस 2026: राष्ट्र निर्माण, संविधान और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका
माननीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण, और मेरे प्रिय साथियों, आज 26 जनवरी के अवसर पर हम सभी यहाँ एकत्र हुए हैं। यह दिन हमें केवल देश की उपलब्धियों की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह सोचने का अवसर भी देता है कि भारत को एक संगठित और जिम्मेदार राष्ट्र बनाने के पीछे किन मूल विचारों ने काम किया।
26 जनवरी 1950 को भारत ने अपने संविधान को लागू किया। इसके साथ ही यह तय हुआ कि देश किसी व्यक्ति की इच्छा से नहीं, बल्कि कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर चलेगा। यही गणतंत्र की असली पहचान है।
गणतंत्र का अर्थ केवल सरकार या प्रशासन तक सीमित नहीं है। इसका संबंध हर उस नागरिक से है, जो इस देश में रहता है और रोज़मर्रा के जीवन में अपने व्यवहार से लोकतंत्र को मजबूत या कमजोर बनाता है।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कई ऐसे महापुरुष हुए, जिनकी सोच ने हमारे गणतंत्र की नींव को दिशा दी। इनमें महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे से जुड़ी धाराओं के रूप में देखा जा सकता है।
महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह स्पष्ट किया कि आज़ादी केवल सत्ता परिवर्तन का नाम नहीं है। उनके लिए स्वतंत्रता का अर्थ था—नैतिकता, अनुशासन और आत्मसंयम। गांधी जी का मानना था कि यदि नागरिक स्वयं जिम्मेदार नहीं होंगे, तो कोई भी व्यवस्था लंबे समय तक नहीं टिक सकती। यह विचार आज के गणतंत्र में भी उतना ही प्रासंगिक है।
वहीं, सरदार वल्लभभाई पटेल ने राष्ट्र निर्माण को व्यावहारिक रूप दिया। उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य किया। स्वतंत्रता के बाद सैकड़ों रियासतों का भारत में विलय आसान काम नहीं था, लेकिन सरदार पटेल ने यह दिखाया कि दृढ़ता, स्पष्टता और अनुशासन से राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जा सकता है।
गांधी जी का नैतिक दृष्टिकोण और सरदार पटेल की प्रशासनिक दृढ़ता—दोनों मिलकर उस भारत की कल्पना करते हैं, जो संविधान के माध्यम से सामने आया। एक छात्र के रूप में इन विचारों का हमारे जीवन से सीधा संबंध है।
स्कूल वह स्थान है जहाँ हमें केवल विषयों की जानकारी नहीं दी जाती, बल्कि यह भी सिखाया जाता है कि कैसे जिम्मेदारी निभाई जाती है, कैसे नियमों का पालन किया जाता है, और कैसे मतभेदों के बावजूद साथ रहना सीखा जाता है।
गणतंत्र दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि लोकतंत्र केवल अधिकारों का संग्रह नहीं है। अधिकार तभी सार्थक होते हैं, जब उनके साथ कर्तव्यों का संतुलन बना रहे। एक छात्र के स्तर पर यह संतुलन बहुत साधारण रूप में दिखाई देता है—समय पर स्कूल आना, ईमानदारी से पढ़ाई करना, नकल से दूर रहना, और अपने व्यवहार से स्कूल का वातावरण सकारात्मक बनाए रखना।
ये छोटे-छोटे कार्य गांधी जी की जिम्मेदार नागरिक की सोच और सरदार पटेल के अनुशासित समाज के विचार से जुड़े हुए हैं। आज का भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, तकनीक और संचार के साधन पहले से कहीं अधिक सुलभ हैं। लेकिन इसके साथ यह चुनौती भी है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ें।
गणतंत्र हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता का अर्थ नियमों से मुक्त होना नहीं है। स्वतंत्रता का सही अर्थ है—नियमों को समझते हुए उनका पालन करना। जब हम कानून का सम्मान करते हैं, जब हम दूसरों की आज़ादी का ध्यान रखते हैं, और जब हम समाज में अनुशासन बनाए रखते हैं—तब हम गांधी और पटेल दोनों की सोच को व्यवहार में उतारते हैं।
अक्सर कहा जाता है कि युवा देश का भविष्य हैं। लेकिन यह भी सच है कि युवा देश का वर्तमान हैं। आज की सोच ही कल की व्यवस्था बनती है। गणतंत्र दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम अपने भीतर यह प्रश्न उठाएँ—क्या हम केवल अधिकारों की बात करते हैं, या अपने कर्तव्यों को भी उतनी ही गंभीरता से लेते हैं?
भारत की ताकत केवल उसकी जनसंख्या या संसाधनों में नहीं है। उसकी असली ताकत उन नागरिकों में है, जो नियमों का पालन करते हैं, मतभेदों को संवाद से सुलझाते हैं और राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देते हैं। गांधी जी ने आत्मअनुशासन पर ज़ोर दिया। सरदार पटेल ने राष्ट्रीय एकता पर। संविधान ने इन दोनों विचारों को एक ढांचे में पिरो दिया।
यदि हम छात्र जीवन से ही इन मूल्यों को अपनाने का प्रयास करें, तो गणतंत्र केवल किताबों में नहीं रहेगा, बल्कि हमारे व्यवहार में भी दिखाई देगा। इसी भावना के साथ, गणतंत्र दिवस 2026 पर हम सभी यह संकल्प लें कि हम जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में छोटे लेकिन ठोस कदम उठाएँगे। धन्यवाद। जय हिंद।
गणतंत्र दिवस 2026: संविधान, राष्ट्रीय एकता और नागरिक चेतना की कसौटी
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण, और मेरे प्रिय साथियों, आज हम 26 जनवरी 2026 को यहाँ एकत्र हुए हैं। यह दिन भारत के इतिहास में केवल एक तारीख नहीं है। यह उस निर्णय की याद दिलाता है, जब देश ने यह तय किया कि शासन किसी व्यक्ति या समूह की इच्छा से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के आधार पर चलेगा।
गणतंत्र का अर्थ केवल इतना नहीं है कि देश में चुनाव होते हैं या सरकार बदलती है। गणतंत्र का वास्तविक अर्थ है—नियमों की सर्वोच्चता और नागरिकों की भागीदारी। यही कारण है कि 26 जनवरी हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बना रहता है।
भारत जैसे विविधताओं वाले देश में गणतंत्र को समझना और निभाना आसान नहीं रहा है। भाषा, संस्कृति, परंपरा और विचारों में भिन्नता के बावजूद देश को एक सूत्र में बाँधना एक बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती को समझने और संभालने में जिन व्यक्तित्वों की भूमिका रही, उनमें महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल का स्थान विशेष है।
महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बार-बार यह स्पष्ट किया कि आज़ादी का मूल्य तभी है, जब समाज नैतिक रूप से मजबूत हो। उनके लिए स्वराज का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं था, बल्कि आत्मनियंत्रण और सामाजिक जिम्मेदारी भी था। गांधी जी मानते थे कि यदि नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं होंगे, तो कोई भी संविधान या व्यवस्था टिक नहीं सकती।
दूसरी ओर, सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्र भारत की एकता को व्यवहारिक रूप दिया। देश आज जिस भौगोलिक स्वरूप में दिखाई देता है, उसके पीछे सरदार पटेल की दृढ़ प्रशासनिक भूमिका रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय एकता केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि अनुशासन और स्पष्ट निर्णयों से कायम रहती है।
यदि गांधी जी ने नागरिक चेतना की नींव रखी, तो सरदार पटेल ने उस चेतना को संगठित ढांचे में बदला। भारतीय संविधान इन दोनों दृष्टिकोणों को संतुलित करता है। यह नागरिकों को अधिकार देता है, लेकिन साथ ही कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। यह स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, लेकिन अनुशासन की सीमा भी तय करता है।
एक छात्र के रूप में हमारा गणतंत्र से रिश्ता बहुत सीधा है। हम सुबह समय पर स्कूल आते हैं या नहीं, हम नियमों का पालन करते हैं या उन्हें तोड़ने के बहाने खोजते हैं, हम असहमति को संवाद से सुलझाते हैं या टकराव से—यही छोटे निर्णय हमें गणतंत्र का सक्रिय भागीदार बनाते हैं।
अक्सर हम गणतंत्र को सरकार, संसद या अदालतों से जोड़कर देखते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि गणतंत्र की पहली इकाई नागरिक होता है। जब नागरिक जागरूक होता है, तभी व्यवस्था प्रभावी बनती है। आज के समय में जब सूचना बहुत तेज़ी से फैलती है, तब जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। हर सुनी हुई बात पर विश्वास करना, बिना जाँच के राय बनाना, या भीड़ के साथ बह जाना—ये सभी बातें नागरिक चेतना को कमजोर करती हैं।
गणतंत्र दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम किस तरह का नागरिक बनना चाहते हैं। गांधी जी का विचार हमें आत्ममंथन सिखाता है—कि पहले स्वयं को सुधारें। सरदार पटेल का दृष्टिकोण हमें दृढ़ता सिखाता है—कि राष्ट्रहित में स्पष्ट और अनुशासित निर्णय ज़रूरी हैं। इन दोनों के बीच संतुलन ही संविधान की आत्मा है।
भारत की प्रगति केवल इमारतों, सड़कों या तकनीक से नहीं मापी जा सकती। वास्तविक प्रगति तब होती है, जब नागरिक कानून का सम्मान करें, सार्वजनिक संपत्ति को अपनी जिम्मेदारी समझें और एक-दूसरे के अधिकारों का ध्यान रखें। एक छात्र के जीवन में ये मूल्य परीक्षा के अंकों से कहीं अधिक महत्व रखते हैं। ईमानदारी, अनुशासन, और सामाजिक संवेदनशीलता—ये वे गुण हैं, जो गणतंत्र को जीवंत बनाते हैं।
गणतंत्र दिवस कोई औपचारिक आयोजन भर नहीं है। यह एक अवसर है, जब हम स्वयं से प्रश्न पूछते हैं—क्या हम केवल अधिकारों की अपेक्षा करते हैं, या अपने कर्तव्यों को भी उतनी ही गंभीरता से निभाते हैं? भारत का भविष्य किसी एक पीढ़ी पर निर्भर नहीं है। यह हर उस नागरिक पर निर्भर करता है, जो आज अपने दायित्व को समझता है। छात्र होने के नाते हम अभी से उस भविष्य की नींव रख रहे हैं।
यदि हम गांधी जी की नैतिक चेतना और सरदार पटेल की राष्ट्रीय एकता की भावना को अपने व्यवहार में उतार सकें, तो गणतंत्र केवल संविधान की पुस्तकों में नहीं रहेगा, बल्कि समाज में दिखाई देगा। इसी भावना के साथ, इस गणतंत्र दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम जिम्मेदार, जागरूक और अनुशासित नागरिक बनने का प्रयास करेंगे। धन्यवाद। जय हिंद।
गणतंत्र दिवस 2026: तकनीक के युग में नागरिक जिम्मेदारी और लोकतंत्र की समझ
माननीय प्रधानाचार्य महोदय, आदरणीय शिक्षकगण, और मेरे प्रिय साथियों, आज 26 जनवरी 2026 को हम सभी यहाँ एकत्र हुए हैं। यह दिन भारत के इतिहास में इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि यह एक राष्ट्रीय पर्व है, बल्कि इसलिए कि यह हमें यह याद दिलाता है कि भारत अपने निर्णय स्वयं करता है—संविधान और कानून के आधार पर।
गणतंत्र दिवस केवल परेड, झंडारोहण या सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। यह दिन हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम किस तरह के नागरिक बन रहे हैं और किस दिशा में देश को आगे ले जाना चाहते हैं। आज का भारत 1950 के भारत से बहुत अलग है। तब देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती एकता और स्थिरता थी। आज की चुनौती है—तेज़ बदलाव के बीच संतुलन बनाए रखना।
तकनीक ने हमारे जीवन को आसान बनाया है। जानकारी अब किताबों तक सीमित नहीं है। मोबाइल फोन, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने ज्ञान को हमारी उँगलियों तक पहुँचा दिया है। लेकिन इसी के साथ एक सवाल भी खड़ा होता है—क्या जानकारी बढ़ने के साथ समझ भी बढ़ी है? यही प्रश्न गणतंत्र को आज के समय में और अधिक प्रासंगिक बनाता है।
भारतीय संविधान हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। लेकिन यह स्वतंत्रता जिम्मेदारी के बिना अधूरी है। बोलने की आज़ादी का अर्थ यह नहीं है कि बिना सोचे-समझे कुछ भी कहा जाए। मत रखने का अधिकार यह भी अपेक्षा करता है कि हम तथ्य और मर्यादा का ध्यान रखें।
एक छात्र के रूप में हम लोकतंत्र को केवल नागरिक शास्त्र की किताब में नहीं पढ़ते, बल्कि रोज़मर्रा के व्यवहार में जीते हैं। जब हम कक्षा में अपनी बात शांति से रखते हैं, जब हम असहमति को बहस में नहीं, संवाद में बदलते हैं, जब हम नियमों को बोझ नहीं, व्यवस्था मानते हैं—तभी हम लोकतांत्रिक मूल्यों को समझते हैं।
आज का युवा तकनीक के साथ बड़ा हो रहा है। यह एक अवसर भी है और एक चुनौती भी। अवसर इसलिए, क्योंकि युवा के पास सीखने, जुड़ने और आगे बढ़ने के साधन हैं। चुनौती इसलिए, क्योंकि गलत जानकारी भी उतनी ही तेज़ी से फैलती है।
गणतंत्र दिवस हमें यह सिखाता है कि हर सूचना सत्य नहीं होती और हर आवाज़ सही दिशा में नहीं ले जाती। एक जागरूक नागरिक वही है, जो सुनने से पहले सोचता है और साझा करने से पहले जाँचता है। संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं है। यह एक सामाजिक समझौता है—जिसमें हर नागरिक से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज के प्रति जिम्मेदार रहेगा।
छात्र जीवन इस जिम्मेदारी की पहली प्रयोगशाला है। हम समय का पालन करते हैं या नहीं, हम सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करते हैं या नहीं, हम कमजोर को सहयोग देते हैं या अनदेखा करते हैं—ये सभी छोटे निर्णय हमें यह बताते हैं कि हम किस तरह के नागरिक बन रहे हैं।
आज जब देश डिजिटल भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब नागरिक अनुशासन का महत्व और बढ़ जाता है। तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाए। गणतंत्र दिवस यह याद दिलाता है कि विकास केवल तेज़ होने से नहीं, बल्कि संतुलित होने से टिकता है।
भारत की ताकत उसकी विविधता में है। विचारों में अंतर लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी पहचान है। लेकिन यह अंतर तभी उपयोगी है, जब उसके साथ सहनशीलता और संवाद जुड़ा हो। एक छात्र के रूप में हमारा दायित्व है कि हम प्रश्न पूछें, लेकिन सम्मान के साथ। हम बदलाव चाहें, लेकिन व्यवस्था को समझते हुए। हम आधुनिक बनें, लेकिन मूल्यों से कटे बिना।
आज का भारत हमसे केवल सपने नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी चाहता है। गणतंत्र दिवस 2026 पर खड़े होकर हम यह सोच सकते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत कैसा दिखेगा। वह भारत तकनीकी रूप से उन्नत होगा, लेकिन उसकी आत्मा संविधान में ही बसेगी।
यदि हम आज अपने छोटे-छोटे कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएँ, तो आने वाला भारत अपने आप मजबूत बनेगा। गणतंत्र किसी एक दिन का उत्सव नहीं है। यह रोज़ का अभ्यास है—नियम मानने का, दूसरों का सम्मान करने का, और सही को चुनने का। इसी भावना के साथ, आइए इस गणतंत्र दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी से करेंगे, लोकतंत्र के मूल्यों को समझेंगे, और एक सजग नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। धन्यवाद। जय हिंद।
FAQs
गणतंत्र दिवस 2026 पर छात्रों के लिए सबसे अच्छा हिंदी भाषण कौन सा है?
गणतंत्र दिवस 2026 के लिए छात्रों का सबसे अच्छा हिंदी भाषण वही माना जाता है जिसमें संविधान, नागरिक जिम्मेदारी और स्कूल जीवन से जुड़े उदाहरण सरल भाषा में समझाए गए हों।
Republic Day 2026 speech Hindi में Class 6–12 के लिए कैसे तैयार करें?
Class 6–12 के लिए Republic Day 2026 speech तैयार करते समय भाषा सरल रखें, भाषण 2–4 मिनट का हो और उसमें संविधान, समानता और जिम्मेदार नागरिकता जैसे विषय शामिल हों।
स्कूल असेंबली के लिए गणतंत्र दिवस 2026 का भाषण कितना लंबा होना चाहिए?
स्कूल असेंबली में गणतंत्र दिवस 2026 का भाषण आमतौर पर 2 से 3 मिनट का रखना उपयुक्त माना जाता है, ताकि संदेश स्पष्ट रहे और कार्यक्रम समय पर पूरा हो सके।
क्या छात्र गणतंत्र दिवस भाषण में संविधान पर बोल सकते हैं?
हाँ, छात्र गणतंत्र दिवस भाषण में संविधान के महत्व, अधिकारों और कर्तव्यों पर तथ्यात्मक और संतुलित तरीके से बोल सकते हैं।
Republic Day speech Hindi छात्रों के लिए आसान भाषा में कैसे लिखें?
छात्रों के लिए आसान Republic Day speech Hindi में लिखने के लिए छोटे वाक्य, रोज़मर्रा के उदाहरण और कठिन शब्दों से बचना बेहतर होता है।
क्या यह Republic Day 2026 speech स्कूल स्टेज प्रोग्राम के लिए सही है?
हाँ, यह Republic Day 2026 speech स्कूल स्टेज प्रोग्राम और असेंबली दोनों के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसकी भाषा गैर-राजनीतिक और शैक्षिक है।
Class 6–12 के छात्रों को गणतंत्र दिवस भाषण में किन बातों से बचना चाहिए?
Class 6–12 के छात्रों को गणतंत्र दिवस भाषण में राजनीतिक बयान, अपुष्ट तथ्य और बहुत कठिन भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए।
गणतंत्र दिवस भाषण हिंदी में याद कैसे करें?
गणतंत्र दिवस भाषण हिंदी में याद करने के लिए छोटे पैराग्राफ में अभ्यास करना, मुख्य बिंदुओं को समझना और बार-बार बोलकर अभ्यास करना उपयोगी रहता है।
26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस भाषण
26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस भाषण: छात्रों के लिए 15 मिनट का प्रेरक और भावनात्मक भाषणगणतंत्र दिवस: सिर्फ़ उत्सव नहीं, लोकतंत्र की ज़िम्मेदारी
🇮🇳 गणतंत्र दिवस: सिर्फ़ उत्सव नहीं, लोकतंत्र की ज़िम्मेदारी – 40+ प्रेरक शायरियाँ और तथ्य


