उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची सुधार अभियान जारी है। जानें कैसे ड्राफ्ट सूची चेक करें, Form‑6/7/8 के जरिए नाम जोड़ें या सुधारें और अपने वोट का अधिकार सुरक्षित रखें।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में चुनाव केवल मतदान का दिन नहीं होते, बल्कि एक लंबी, जटिल और सतत प्रशासनिक प्रक्रिया का परिणाम होते हैं। इसी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण आधार है—मतदाता सूची। यदि मतदाता सूची सटीक नहीं है, तो चुनाव की निष्पक्षता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक वैधता तीनों पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
इसी संदर्भ में UP Voter Roll Revision 2026 को केवल एक तकनीकी अभ्यास नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की बुनियादी कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में चल रहा यह मतदाता सूची सुधार अभियान (Special Intensive Revision – SIR) उन सभी नागरिकों से सीधे जुड़ा है, जिनका नाम मतदान सूची में दर्ज है या दर्ज होना चाहिए। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदान से वंचित न रहे और कोई भी अपात्र नाम सूची में बना न रहे।
मतदाता सूची क्यों लोकतंत्र की रीढ़ है
भारतीय लोकतंत्र में “एक व्यक्ति, एक वोट” का सिद्धांत तभी प्रभावी हो सकता है, जब मतदाता सूची त्रुटिरहित हो।
यदि सूची में गलत नाम, मृत व्यक्तियों के नाम, स्थानांतरित मतदाताओं की पुरानी प्रविष्टियाँ या डुप्लिकेट एंट्री मौजूद रहती हैं, तो इसका असर केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी पड़ता है।
उत्तर प्रदेश में मतदाता संख्या देश में सबसे अधिक है। ऐसे में एक छोटी सी प्रशासनिक चूक भी लाखों वोटों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO UP) समय-समय पर मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कराते हैं।
Special Intensive Revision (SIR) क्या है और क्यों जरूरी है
Special Intensive Revision एक विशेष अभियान है, जिसमें मतदाता सूची को सामान्य अपडेट से कहीं अधिक विस्तार और सख्ती के साथ जांचा जाता है।
इस प्रक्रिया के दौरान:
- पुराने या गलत रिकॉर्ड हटाए जाते हैं
- स्थानांतरित मतदाताओं का पता अपडेट किया जाता है
- नए योग्य मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाता है
- उम्र, नाम, पता और अन्य विवरणों की त्रुटियाँ सुधारी जाती हैं
यह प्रक्रिया विशेष रूप से चुनाव से पहले इसलिए की जाती है, ताकि अंतिम मतदाता सूची यथासंभव सटीक और भरोसेमंद हो।
BLO की भूमिका: लोकतंत्र का जमीनी प्रतिनिधि
मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया कागजों या वेबसाइट तक सीमित नहीं रहती। इसका सबसे अहम चेहरा होते हैं Booth Level Officers (BLOs)।
BLO स्थानीय स्तर पर नियुक्त वे अधिकारी होते हैं, जो अपने-अपने बूथ क्षेत्र में घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करते हैं।
BLO का काम केवल डेटा इकट्ठा करना नहीं है। वे नागरिकों को यह भी समझाते हैं कि:
- नाम सूची में है या नहीं
- जानकारी सही है या नहीं
- सुधार या दावा कैसे किया जा सकता है
कई बार ग्रामीण और शहरी गरीब इलाकों में यही BLO नागरिक और चुनाव आयोग के बीच एकमात्र संपर्क कड़ी होते हैं।
ड्राफ्ट सूची और अंतिम सूची का अंतर
मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया दो अहम चरणों में होती है:
ड्राफ्ट मतदाता सूची
यह अस्थायी सूची होती है, जिसे जनता के सामने इसलिए रखा जाता है ताकि लोग इसमें अपनी जानकारी जांच सकें। ड्राफ्ट सूची का उद्देश्य ही यह होता है कि अगर कोई गलती है, तो उसे समय रहते सुधारा जा सके।
अंतिम मतदाता सूची
दावे और आपत्तियों की अवधि पूरी होने के बाद जो सूची जारी होती है, वही अंतिम मानी जाती है। यदि किसी मतदाता का नाम अंतिम सूची में नहीं है, तो वह चुनाव में मतदान नहीं कर सकता—भले ही वह पात्र क्यों न हो।
इसीलिए ड्राफ्ट सूची की जांच को चुनाव आयोग “नागरिक जिम्मेदारी” के रूप में देखता है।
नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया क्यों अहम है
अक्सर मतदाता सूची सुधार को लोग प्रशासन का काम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन व्यवहार में इसका सबसे बड़ा असर आम नागरिक पर पड़ता है।
- यदि नाम गलत वर्तनी के साथ दर्ज है, तो पहचान में दिक्कत आ सकती है
- अगर उम्र या पता गलत है, तो नाम हटने का खतरा रहता है
- यदि स्थानांतरण के बाद पुराना पता दर्ज है, तो नए क्षेत्र में वोट नहीं डाल पाएंगे
मतदाता सूची में नाम होना केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी की शर्त है।
नए मतदाता और पहली बार वोट देने वाले
UP Voter Roll Revision 2026 का एक अहम उद्देश्य उन युवाओं को सूची में जोड़ना है, जो पहली बार मतदान के योग्य बने हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिकों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण मौका होता है।
कई बार जागरूकता की कमी के कारण युवा मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से चूक जाते हैं और चुनाव के समय खुद को असहाय पाते हैं। इस अभियान के दौरान BLO और चुनाव आयोग का फोकस विशेष रूप से नए मतदाताओं पर रहता है।
Form-6, Form-7 और Form-8 की भूमिका
मतदाता सूची सुधार के दौरान कुछ मानक फॉर्म का उपयोग किया जाता है, जिनका उद्देश्य अलग-अलग स्थितियों को संभालना है।
- Form-6: नया नाम जोड़ने के लिए
- Form-7: नाम हटाने या आपत्ति दर्ज करने के लिए
- Form-8: नाम, पता, उम्र या अन्य विवरण में सुधार के लिए
इन फॉर्म्स को भरना किसी कानूनी जटिलता जैसा नहीं है। इन्हें सरल रखा गया है ताकि आम नागरिक भी आसानी से प्रक्रिया पूरी कर सके।
ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रिया का संतुलन
डिजिटल इंडिया के दौर में मतदाता सूची से जुड़े कई काम ऑनलाइन हो चुके हैं। CEO UP की वेबसाइट और निर्वाचन आयोग के पोर्टल के जरिए नागरिक:
- ड्राफ्ट सूची देख सकते हैं
- आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं
- आवश्यक फॉर्म ऑनलाइन भर सकते हैं
लेकिन चुनाव आयोग यह भी जानता है कि हर नागरिक डिजिटल रूप से सक्षम नहीं है। इसलिए ऑफलाइन प्रक्रिया—BLO के माध्यम से—अब भी उतनी ही अहम है।
पारदर्शिता और भरोसे का सवाल
मतदाता सूची सुधार केवल तकनीकी शुद्धता का मामला नहीं है। यह लोकतांत्रिक भरोसे का सवाल भी है। जब नागरिक को यह भरोसा होता है कि उसका नाम सही ढंग से दर्ज है, तो वह चुनाव प्रक्रिया में अधिक विश्वास के साथ भाग लेता है।
यही कारण है कि चुनाव आयोग हर स्तर पर यह स्पष्ट करता है कि:
- किसी का नाम मनमाने ढंग से नहीं हटाया जाएगा
- हर दावे और आपत्ति की जांच होगी
- अंतिम निर्णय नियमों और रिकॉर्ड के आधार पर होगा
राजनीतिक तटस्थता और प्रशासनिक जिम्मेदारी
मतदाता सूची सुधार एक संवेदनशील प्रक्रिया है, क्योंकि इसका सीधा संबंध चुनाव से है। इसीलिए चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन इस प्रक्रिया को पूरी तरह राजनीतिक प्रभाव से दूर रखने की कोशिश करते हैं।
BLO, जिला निर्वाचन अधिकारी और CEO कार्यालय—सभी को यह निर्देश होते हैं कि किसी भी राजनीतिक दबाव, अफवाह या अनुमान से प्रभावित हुए बिना काम किया जाए।
आम गलतियाँ जिनसे बचना जरूरी है
मतदाता सूची सुधार के दौरान कुछ सामान्य गलतियाँ बार-बार सामने आती हैं:
- ड्राफ्ट सूची को “अंतिम” मान लेना
- यह मान लेना कि पिछली बार वोट दिया था तो नाम अपने-आप रहेगा
- BLO से संपर्क न करना
- समय-सीमा की अनदेखी करना
इन गलतियों का खामियाजा चुनाव के दिन भुगतना पड़ता है, जब नाम सूची में नहीं मिलता।
लोकतांत्रिक भागीदारी का वास्तविक अर्थ
मतदान केवल एक दिन का कार्य नहीं है। लोकतांत्रिक भागीदारी की शुरुआत उस क्षण से होती है, जब नागरिक यह सुनिश्चित करता है कि उसका नाम मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज है।
UP Voter Roll Revision 2026 इसी सोच को मजबूत करने का प्रयास है—जहाँ नागरिक केवल वोटर नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनता है।
निष्कर्ष के बजाय एक नागरिक अपील
मतदाता सूची सुधार अभियान को किसी सरकारी औपचारिकता की तरह नहीं, बल्कि अपने अधिकार की सुरक्षा के अवसर की तरह देखना जरूरी है। नाम की एक छोटी सी गलती, पता की एक पुरानी एंट्री या उम्र का एक गलत अंक—पूरे लोकतांत्रिक अधिकार को रोक सकता है।
उत्तर प्रदेश में चल रहा यह अभियान हर नागरिक को यह मौका देता है कि वह समय रहते अपनी जानकारी जांचे, सुधारे और सुनिश्चित करे कि जब मतदान का दिन आए, तो उसका नाम सूची में हो—बिना किसी बाधा के।
लोकतंत्र मजबूत तभी होता है, जब नागरिक सजग होता है। और सजग नागरिक की पहली जिम्मेदारी—मतदाता सूची में अपना सही नाम।
🔍 FAQs: UP Voter Roll Revision 2026
1. UP Voter Roll Revision 2026 क्या है?
UP Voter Roll Revision 2026 उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया है, जिसमें नए वोटर जोड़े जाते हैं और गलत या डुप्लिकेट नाम सुधारे या हटाए जाते हैं।
2. UP voter list draft 2026 कैसे चेक करें?
मतदाता CEO UP की आधिकारिक वेबसाइट या अपने विधानसभा क्षेत्र के पोर्टल पर जाकर नाम, उम्र और पता चेक कर सकते हैं। BLO के माध्यम से भी ड्राफ्ट सूची देखी जा सकती है।
3. अगर वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या करें?
यदि नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो नया नाम जोड़ने के लिए Form-6 भरना होता है, जिसे ऑनलाइन या BLO के जरिए जमा किया जा सकता है।
4. वोटर आईडी में नाम या पता गलत हो तो सुधार कैसे करें?
नाम, पता, उम्र या अन्य विवरण में गलती होने पर Form-8 के माध्यम से सुधार के लिए आवेदन किया जाता है।
5. वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया क्या है?
गलत, डुप्लिकेट या मृत व्यक्ति के नाम को हटाने के लिए Form-7 के जरिए आपत्ति दर्ज की जाती है, जिस पर जांच के बाद निर्णय लिया जाता है।
6. BLO कौन होता है और उसकी क्या भूमिका है?
BLO (Booth Level Officer) चुनाव आयोग का स्थानीय प्रतिनिधि होता है, जो घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करता है और फॉर्म भरने में मदद करता है।
7. क्या ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और फाइनल वोटर लिस्ट अलग होती है?
हाँ। ड्राफ्ट सूची अस्थायी होती है, जिसमें सुधार का मौका मिलता है। दावे-आपत्तियों के बाद जो सूची जारी होती है, वही अंतिम (Final Voter List) मानी जाती है।
8. वोटर लिस्ट में नाम न होने पर क्या वोट डाल सकते हैं?
नहीं। यदि नाम अंतिम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो मतदान की अनुमति नहीं मिलती, भले ही व्यक्ति पात्र क्यों न हो।
9. नए वोटर का नाम वोटर लिस्ट में कब जुड़ता है?
18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं का नाम Revision अभियान के दौरान Form-6 के सत्यापन के बाद जोड़ा जाता है।
10. UP Voter Roll Revision 2026 क्यों जरूरी है?
यह प्रक्रिया चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए जरूरी है, ताकि हर योग्य नागरिक वोट दे सके और गलत प्रविष्टियाँ हटाई जा सकें।





