मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? जानिए मकर संक्रांति 2026 की तिथि, इतिहास, अर्थ, निबंध और 10 पंक्तियाँ हिंदी में।
मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है: तिथि, इतिहास और अर्थ
मकर संक्रांति भारत के उन प्रमुख पर्वों में शामिल है, जिनका आधार धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ खगोलीय और सामाजिक तथ्यों पर भी टिका है। यह पर्व सूर्य की गति से जुड़ा हुआ है और हर वर्ष लगभग एक ही तिथि के आसपास मनाया जाता है।
मकर संक्रांति का क्या अर्थ है
संक्रांति का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना। मकर संक्रांति उस दिन को कहा जाता है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। यही कारण है कि इस संक्रांति को अन्य संक्रांतियों से अधिक महत्व प्राप्त है।
14 जनवरी को मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है
मकर संक्रांति सौर गणना पर आधारित पर्व है। पृथ्वी की गति और सूर्य की स्थिति के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सामान्यतः 14 जनवरी के आसपास होता है। इसी कारण यह पर्व हर साल लगभग इसी तिथि को मनाया जाता है।
मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को
अधिकांश वर्षों में मकर संक्रांति 14 जनवरी को होती है, लेकिन कभी-कभी खगोलीय गणना में सूक्ष्म अंतर के कारण यह 15 जनवरी को भी पड़ सकती है। पर्व की तिथि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के वास्तविक समय पर निर्भर करती है।
मकर संक्रांति का इतिहास क्या है
भारतीय ग्रंथों और परंपराओं में मकर संक्रांति को उत्तरायण की शुरुआत माना गया है। महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा उत्तरायण काल की प्रतीक्षा का उल्लेख इस पर्व के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
इतिहासकारों के अनुसार यह पर्व प्राचीन कृषि समाज में ऋतु परिवर्तन और नई फसल चक्र की शुरुआत का प्रतीक रहा है।
मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है
- सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत
- ऋतु परिवर्तन का संकेत
- कृषि चक्र में नए चरण का आरंभ
- दान, स्नान और सामाजिक समरसता का पर्व
मकर संक्रांति 2026 की तिथि
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाई जाएगी। अधिकांश पंचांगों के अनुसार यह पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
मकर संक्रांति पर निबंध (संक्षेप में)
मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख पर्व है जो सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। यह पर्व धार्मिक, सामाजिक और कृषि तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और पारंपरिक भोजन का विशेष महत्व होता है।
मकर संक्रांति पर 10 पंक्तियाँ
- मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है।
- यह पर्व हर साल जनवरी में मनाया जाता है।
- इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है।
- दान और स्नान का विशेष महत्व माना गया है।
- तिल और गुड़ का सेवन परंपरागत है।
- किसानों के लिए यह पर्व विशेष होता है।
- दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।
- यह पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है।
- भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे अलग नामों से मनाया जाता है।
- मकर संक्रांति सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।




