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अदालतों ने किरायेदारों को बेदखल करने के नए नियम लागू किए
5 मिनट न्यूज़28 दिसंबर 2025

अदालतों ने किरायेदारों को बेदखल करने के नए नियम लागू किए

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2025 के नए किराया कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार मकान मालिक और किरायेदार दोनों के लिए नियम अपडेट। जानें पंजीकरण, नोटिस और कानूनी प्रक्रिया।

परिचय

भारत में किरायेदारी और संपत्ति विवाद सदैव से ही सामाजिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं। 2025 में सुप्रीम कोर्ट के नए फैसलों के बाद मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकार और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट हुई हैं। यह बदलाव सिर्फ कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की सुरक्षा और न्यायसंगत प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए भी है।

नए नियम मकान मालिकों को संपत्ति की वैध वापसी का अधिकार देते हैं और किरायेदारों को अचानक बेदखली से बचाते हैं। साथ ही, यह कानून पंजीकरण, नोटिस, कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट में सुनवाई की पूरी व्याख्या करता है। इस लेख में हम step-by-step समझेंगे कि नए कानून के तहत कौन क्या कर सकता है और practical tips क्या हैं।

1. मकान मालिक और किरायेदार के अधिकार

मकान मालिक के अधिकार

  • कानूनी बेदखली का अधिकार: मकान मालिक के पास यह अधिकार है कि यदि किरायेदार ने किराया नहीं दिया या समझौते का उल्लंघन किया है, तो वे कानूनी प्रक्रिया का पालन कर उसे बेदखल कर सकते हैं।
  • उत्तराधिकारी द्वारा मुकदमा जारी रखना: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मकान मालिक की मृत्यु के बाद उनके वारिस भी बेदखली का मुकदमा जारी रख सकते हैं।
  • संपत्ति की सुरक्षा: पंजीकृत किरायेदारी के माध्यम से मकान मालिक संपत्ति पर वैध नियंत्रण बनाए रख सकता है।

किरायेदार के अधिकार

  • सुरक्षा और नोटिस का अधिकार: किरायेदार खुद को अचानक बेदखल होने से बचा सकता है। मकान मालिक को लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
  • कानूनी प्रक्रिया का पालन: किरायेदार को कोर्ट में मुकदमा चलाने के दौरान अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
  • Self-help eviction अवैध: मकान मालिक खुद से दरवाजा तोड़कर या जबरन बेदखली नहीं कर सकता।

2. नए नियम और कानूनी बदलाव

2.1 पंजीकरण अनिवार्य

  • 11 महीने या उससे अधिक की किरायेदारी अब पंजीकृत होना आवश्यक है।
  • इससे धोखाधड़ी और संपत्ति विवाद में कमी आती है।
  • पंजीकरण में दोनों पक्षों के दस्तावेज और समझौते दर्ज किए जाते हैं।

2.2 नोटिस देना अनिवार्य

  • मकान मालिक को किरायेदार को लिखित नोटिस भेजना होगा।
  • नोटिस में कारण, अवधि और खाली करने की अंतिम तारीख स्पष्ट होनी चाहिए।
  • बिना नोटिस बेदखली अवैध मानी जाएगी।

2.3 कानूनी प्रक्रिया

  • कानूनी नोटिस: उदाहरण: किराया न देने या अन्य उल्लंघन की स्थिति में नोटिस जारी करना।
  • सिविल कोर्ट में मुकदमा: नोटिस के बावजूद अगर किरायेदार नहीं निकले, तो कोर्ट में मामला दायर किया जाता है।
  • सुनवाई और आदेश: अदालत मामले की पूरी जांच के बाद निर्णय देती है और यदि सही पाया तो बेदखली का आदेश देती है।
  • पुलिस की सहायता: कोर्ट के आदेश के बाद भी अगर किरायेदार नहीं निकले, तो पुलिस मदद करती है।

3. Adverse Possession और Self-help Eviction

3.1 Adverse Possession (अनधिकृत कब्जा)

  • यदि कोई किरायेदार लंबे समय तक बिना पंजीकृत समझौते के संपत्ति पर कब्जा करता है, तो वह मालिक नहीं बन सकता।
  • सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किरायानामा मौजूद होने पर 12 साल का कब्जा भी अधिकार नहीं देता।
  • मकान मालिक को हमेशा अपने दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।

3.2 Self-help Eviction (स्वयं-बेदखली)

  • मकान मालिक खुद से जबरन निकासी या संपत्ति पर कब्जा अवैध है।
  • ऐसा करने पर कानून के तहत सजा और नागरिक कार्रवाई हो सकती है।
  • हमेशा कोर्ट और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

4. वारिसों के अधिकार

  • मकान मालिक की मृत्यु के बाद उनका कानूनी उत्तराधिकारी बेदखली का मुकदमा जारी रख सकता है।
  • इससे संपत्ति के विरासत विवादों में तेजी आती है।
  • यह नियम मकान मालिक के परिवार और कानूनी उत्तराधिकारियों के हितों की रक्षा करता है।

5. Forms और दस्तावेज़

5.1 पंजीकरण फॉर्म

  • किरायेदारी समझौता: दोनों पक्षों के नाम, पता, किराया राशि, अवधि।
  • किरायेदारी रजिस्ट्रेशन फॉर्म: स्थानीय Sub-Registrar कार्यालय में जमा करना अनिवार्य।

5.2 नोटिस और कोर्ट फॉर्म

  • Eviction Notice: कारण और समय के साथ।
  • Civil Suit Filing Form: कोर्ट में बेदखली के लिए।
  • Evidence Submission: रसीद, पंजीकरण, फोटो, अन्य दस्तावेज।

6. District / City Level Examples

Example 1: दिल्ली

  • मकान मालिक ने 12 महीने से अधिक किरायेदार से नोटिस के बिना बेदखली की कोशिश की।
  • कोर्ट ने Self-help eviction को अवैध मानते हुए मकान मालिक को नोटिस देने का आदेश दिया।

Example 2: मुंबई

  • किरायेदार ने 15 साल तक बिना पंजीकृत समझौते के संपत्ति में कब्जा किया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने Adverse Possession नियम के तहत उसे मालिक नहीं माना और मकान मालिक के पक्ष में फैसला दिया।

Example 3: लखनऊ

  • वारिसों ने मकान मालिक की मृत्यु के बाद बेदखली का मुकदमा जारी रखा।
  • कोर्ट ने अंतिम निर्णय में वारिसों को अधिकार दिया।

7. Practical Tips for Landlords

  • किरायेदारी पंजीकरण हमेशा करें
  • हर नोटिस लिखित और रिकॉर्डेड हो
  • Self-help eviction से बचें
  • Adverse Possession को ध्यान में रखें
  • Court procedures को समय पर शुरू करें
  • Documents, receipts और फोटो evidence सुरक्षित रखें

8. Practical Tips for Tenants

  • किरायेदारी समझौते की कॉपी रखें
  • किराया समय पर जमा करें
  • नोटिस मिलने पर कोर्ट में जवाब दें
  • Self-help eviction के खिलाफ शिकायत दर्ज करें
  • Adverse Possession या गैर-पंजीकृत समझौते से सावधान रहें

9. Legal Compliance और Advisory

  • हर मकान मालिक और किरायेदार को स्थानीय Rent Control Act और Supreme Court निर्देशों का पालन करना चाहिए।
  • Eviction के मामलों में legal advice लेना हमेशा सुरक्षित होता है।
  • किसी भी Dispute में mediation या online dispute resolution (ODR) विकल्प भी देखें।

10. निष्कर्ष

2025 के नए किराया कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले मकान मालिक और किरायेदार दोनों के हितों का संतुलन बनाए रखते हैं।

  • मकान मालिक को संपत्ति कानूनी रूप से वापस पाने का तरीका मिलता है।
  • किरायेदार को अचानक बेदखली और अन्य गलत प्रैक्टिस से सुरक्षा मिलती है।
  • Adverse Possession और Self-help eviction को रोककर कानून व्यवस्था मजबूत होती है।
  • Proper documentation, नोटिस और legal compliance भविष्य में विवादों से बचाव करती है।

सही जानकारी, सावधानी और कानूनी प्रक्रिया का पालन करके आप अपने अधिकार सुरक्षित रख सकते हैं। यह नियम सिर्फ कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि पारदर्शिता और न्यायसंगत व्यवहार को भी सुनिश्चित करते हैं।

FAQs – नए किराया कानून और बेदखली नियम

किरायेदार को बिना नोटिस बेदखल करना कानूनी है या नहीं?

नहीं। मकान मालिक को बेदखली से पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। बिना कानूनी प्रक्रिया के किया गया eviction अवैध माना जाएगा।

कितने महीने की किरायेदारी का रजिस्ट्रेशन जरूरी है?

11 महीने या उससे अधिक की किरायेदारी पंजीकरण अनिवार्य है। यह धोखाधड़ी और विवाद रोकता है।

किरायेदार लंबे समय तक रहने के बाद संपत्ति का मालिक बन सकता है?

नहीं। यदि किरायानामा मौजूद है, तो लंबी अवधि पर भी किरायेदार संपत्ति का मालिक नहीं बन सकता।

Bail, Adverse Possession और बेदखली में नया नियम क्या है?

बिना लिखित समझौते के कोई भी किरायेदार Adverse Possession के तहत भी मालिक नहीं बन सकता।

मकान मालिक की मृत्यु के बाद बेदखली का मामला कैसे जारी रहेगा?

मकान मालिक के वारिस कानूनी रूप से बेदखली का मुकदमा जारी रख सकते हैं।

बेदखली की कानूनी प्रक्रिया क्या है?

1) लिखित नोटिस देना 2) नोटिस के बाद भी न हटने पर सिविल कोर्ट में मुकदमा 3) कोर्ट के आदेश पर किरायेदार को निकालना 4) कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस सहायता लेना

मकान मालिक खुद से जबरन बेदखली कर सकता है?

नहीं। Self-help eviction कानूनी रूप से अवैध है।

Forms और दस्तावेज़ कौन संभालेगा?

सभी कानूनी नोटिस और मुकदमे के दस्तावेज़ मालिक और उनके वकील द्वारा संभाले जाते हैं।

किरायेदार के अधिकार क्या हैं?

किरायेदार के पास न्यायिक प्रक्रिया का पालन और सुरक्षा का अधिकार है। उन्हें अचानक बेदखली से सुरक्षा है।

नए नियम मकान मालिक और किरायेदार दोनों के लिए कैसे सुरक्षित हैं?

मकान मालिक को संपत्ति वापस लेने का कानूनी तरीका मिलता है, और किरायेदार को सुरक्षित रहने का अधिकार। दोनों पक्षों के हित संरक्षित रहते हैं।