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स्वदेशी AI-आधारित इलेक्ट्रिक वाहन: भारत में ऑटोमोबाइल तकनीक का बदलता परिदृश्य (2026–2027)
5 मिनट न्यूज़29 दिसंबर 2025

स्वदेशी AI-आधारित इलेक्ट्रिक वाहन: भारत में ऑटोमोबाइल तकनीक का बदलता परिदृश्य (2026–2027)

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भारत में AI-सक्षम स्वदेशी इलेक्ट्रिक वाहन, टाटा नेक्सन ईवी, महिंद्रा MAIA, ओला इलेक्ट्रिक और ड्राइवरलेस तकनीक पर शोध की पूरी और तथ्यात्मक जानकारी।

स्वदेशी AI-आधारित इलेक्ट्रिक वाहन: भारत में ऑटोमोबाइल तकनीक का बदलता परिदृश्य (2026–2027)

प्रस्तावना: जब इलेक्ट्रिक वाहन “स्मार्ट मशीन” बनते जा रहे हैं

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की चर्चा लंबे समय तक केवल ईंधन बचत, प्रदूषण नियंत्रण और आयातित तेल पर निर्भरता घटाने तक सीमित रही। लेकिन 2020 के दशक के मध्य तक आते-आते यह परिदृश्य तेजी से बदलने लगा है। अब इलेक्ट्रिक वाहन केवल बैटरी और मोटर का संयोजन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे डेटा-आधारित, AI-सक्षम और लगातार सीखने वाली प्रणालियों में बदल रहे हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रवेश भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में एक तकनीकी प्रयोग भर नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव का संकेत है जिसमें वाहन ड्राइवर के व्यवहार को समझते हैं, सड़क की स्थिति का अनुमान लगाते हैं और अपने प्रदर्शन को समय के साथ बेहतर बनाते हैं। 2026–2027 के आसपास भारत जिस EV इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है, उसमें “स्वदेशी AI तकनीक” एक केंद्रीय भूमिका निभाती दिखाई दे रही है।

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: एक विकसित होता संदर्भ

भारत ने बीते कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर स्पष्ट नीति संकेत दिए हैं। FAME जैसी योजनाओं, राज्य-स्तरीय EV पॉलिसी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि EVs अब भविष्य की संभावना नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता बन चुके हैं।

इसी संदर्भ में AI का महत्व इसलिए बढ़ता है क्योंकि भारतीय सड़कें, ट्रैफिक पैटर्न और ड्राइविंग व्यवहार वैश्विक मानकों से काफी अलग हैं। यहां लेन-अनुशासन, पैदल यात्रियों की अनिश्चित आवाजाही, दोपहिया-तीपहिया वाहनों की अधिक संख्या और सड़क की गुणवत्ता में भारी विविधता देखने को मिलती है। ऐसे में सीधे पश्चिमी देशों में विकसित AI मॉडल को अपनाना व्यावहारिक नहीं माना जाता। यही कारण है कि भारतीय कंपनियां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षित AI सिस्टम विकसित करने पर जोर दे रही हैं।

AI और इलेक्ट्रिक वाहन: तकनीकी तालमेल को समझना

AI का उपयोग EVs में कई स्तरों पर किया जा रहा है। यह केवल “ड्राइवरलेस कार” तक सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि एक व्यापक तकनीकी ढांचा है।

सबसे बुनियादी स्तर पर AI सिस्टम वाहन से लगातार आने वाले डेटा—जैसे बैटरी तापमान, चार्जिंग पैटर्न, ड्राइविंग शैली, ब्रेकिंग व्यवहार और लोकेशन—का विश्लेषण करते हैं। इस विश्लेषण के आधार पर वाहन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए सुझाव या स्वचालित समायोजन किए जाते हैं।

उच्च स्तर पर, AI आधारित Advanced Driver Assistance Systems (ADAS) ड्राइवर को लेन-कीपिंग, कोलिजन चेतावनी, अडैप्टिव क्रूज़ कंट्रोल जैसे फीचर्स प्रदान करती है। भारतीय संदर्भ में इन फीचर्स को “पूर्ण स्वायत्तता” की बजाय ड्राइवर-सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है।

भारतीय इलेक्ट्रिक कारों में AI का बढ़ता उपयोग

टाटा नेक्सन ईवी: कनेक्टेड इंटेलिजेंस का व्यावहारिक मॉडल

टाटा मोटर्स की नेक्सन ईवी को भारत की सबसे सफल इलेक्ट्रिक एसयूवी में गिना जाता है। यह वाहन इस बात का उदाहरण है कि AI को किस तरह व्यावहारिक और उपयोगकर्ता-अनुकूल रूप में पेश किया जा सकता है।

नेक्सन ईवी में मौजूद कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी ड्राइवर को बैटरी स्टेटस, रेंज अनुमान, चार्जिंग लोकेशन और ड्राइविंग पैटर्न से जुड़ी जानकारी प्रदान करती है। AI आधारित एल्गोरिद्म इन डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण कर यह समझने की कोशिश करते हैं कि वाहन का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है और किन परिस्थितियों में ऊर्जा खपत अधिक होती है।

यह सिस्टम पूर्ण स्वायत्त ड्राइविंग का दावा नहीं करता, बल्कि भारतीय उपभोक्ता के लिए भरोसेमंद और नियंत्रित अनुभव देने पर केंद्रित है। यही दृष्टिकोण इसे भारतीय सड़कों के लिए अधिक उपयुक्त बनाता है।

महिंद्रा का ‘MAIA’ प्लेटफॉर्म: भारतीय परिस्थितियों पर केंद्रित AI

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपने आगामी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ‘MAIA’ (Mahindra Artificial Intelligence Architecture) नामक AI प्लेटफॉर्म विकसित किया है। कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय सड़कों की वास्तविकता को समझना है।

MAIA को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह ट्रैफिक घनत्व, सड़क की गुणवत्ता, ड्राइवर के व्यवहार और पर्यावरणीय कारकों को एक साथ विश्लेषित कर सके। आगामी इलेक्ट्रिक मॉडल्स—जैसे BE.06 और XUV.e9—में इसके उपयोग की बात सामने आई है।

महिंद्रा का दृष्टिकोण यह संकेत देता है कि 2026–2027 के भारत में AI का प्रयोग “ड्राइवर को हटाने” की बजाय “ड्राइवर की मदद करने” पर केंद्रित रहेगा।

ओला इलेक्ट्रिक: दोपहिया से चारपहिया तक AI की यात्रा

ओला इलेक्ट्रिक ने भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया सेगमेंट में तेज़ी से अपनी पहचान बनाई है। कंपनी द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर-केंद्रित दृष्टिकोण इस बात का संकेत देता है कि उसकी आने वाली इलेक्ट्रिक कार भी AI-driven ecosystem का हिस्सा होगी।

उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, ओला की कार परियोजना में सस्पेंशन, कंट्रोल सिस्टम और ड्राइविंग अनुभव को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें AI का उपयोग ड्राइविंग डेटा विश्लेषण, ऊर्जा प्रबंधन और स्मार्ट इंटरफेस के लिए किया जा सकता है।

यह मॉडल पारंपरिक ऑटोमोबाइल सोच से अलग है, जहां वाहन को एक स्थिर उत्पाद माना जाता था। यहां वाहन को एक अपडेट होने वाली डिजिटल मशीन के रूप में देखा जा रहा है।

स्वदेशी ड्राइवरलेस तकनीक: शोध और प्रयोग का चरण

भारत में पूरी तरह AI-संचालित ड्राइवरलेस कारें अभी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर इस विषय पर अतिरंजित दावे किए जाते हैं। वास्तविकता यह है कि भारत में स्वायत्त वाहन तकनीक अभी शोध, परीक्षण और सीमित प्रयोग के स्तर पर है।

शैक्षणिक और औद्योगिक सहयोग

बेंगलुरु में Wipro, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और RV कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग जैसे संस्थानों द्वारा विकसित ड्राइवरलेस प्रोटोटाइप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारतीय सड़कों की विशिष्ट चुनौतियों—जैसे गड्ढे, अनियमित ट्रैफिक और अप्रत्याशित बाधाएं—को समझना और उनके अनुरूप एल्गोरिद्म विकसित करना है।

ये प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि भारत में स्वायत्त तकनीक का विकास “कॉपी-पेस्ट मॉडल” पर नहीं, बल्कि स्थानीय डेटा और अनुभव के आधार पर किया जा रहा है।

नियंत्रित वातावरण में स्वायत्त वाहन

ओमेगा सेकी मोबिलिटी द्वारा विकसित ‘स्वयं गति’ जैसे प्रोजेक्ट इस बात का उदाहरण हैं कि भारत में स्वायत्त तकनीक का उपयोग सबसे पहले नियंत्रित और सीमित वातावरण में किया जा रहा है। हवाई अड्डों, स्मार्ट कैंपस और औद्योगिक परिसरों में ऐसे AI-संचालित इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग अपेक्षाकृत सुरक्षित और व्यावहारिक माना जाता है।

यह दृष्टिकोण भविष्य के लिए एक क्रमिक रास्ता सुझाता है, जहां तकनीक को पहले सीमित दायरे में परखा जाएगा और फिर धीरे-धीरे सार्वजनिक सड़कों पर लाया जाएगा।

बैटरी इंटेलिजेंस और AI का संबंध

AI आधारित इलेक्ट्रिक वाहनों का एक महत्वपूर्ण पहलू बैटरी प्रबंधन है। बैटरी EV का सबसे महंगा और संवेदनशील हिस्सा होती है। AI एल्गोरिद्म बैटरी के तापमान, चार्ज-डिस्चार्ज चक्र और उपयोग पैटर्न का विश्लेषण कर इसकी उम्र बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

2026–2027 तक भारतीय EVs में predictive maintenance जैसी अवधारणाएं अधिक आम हो सकती हैं, जहां वाहन पहले ही संकेत दे देगा कि किसी घटक की सर्विस की आवश्यकता है। यह न केवल उपभोक्ता के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि EV अपनाने की लागत को भी नियंत्रित कर सकता है।

नियामक और सुरक्षा परिदृश्य

AI-सक्षम वाहनों के साथ सुरक्षा और नियमन का प्रश्न स्वाभाविक रूप से जुड़ा हुआ है। भारत में अभी तक स्वायत्त वाहनों के लिए कोई व्यापक कानूनी ढांचा लागू नहीं है। हालांकि, ADAS जैसे फीचर्स के लिए मानक धीरे-धीरे विकसित किए जा रहे हैं।

नीति-निर्माताओं के लिए चुनौती यह है कि नवाचार को बढ़ावा देते हुए सड़क सुरक्षा और उपभोक्ता हितों की रक्षा कैसे की जाए। 2026–2027 के दौरान यह क्षेत्र नीतिगत चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

आम जनता और देश के लिए व्यापक महत्व

AI-आधारित स्वदेशी इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रभाव केवल तकनीकी नहीं है। इसका संबंध पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता से भी है।

इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण में कमी और ईंधन आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। वहीं AI और स्वदेशी सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म भारत को केवल वाहन निर्माता नहीं, बल्कि मोबिलिटी टेक्नोलॉजी इनोवेटर के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

यह बदलाव रोजगार, अनुसंधान और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

2026–2027 की यथार्थवादी तस्वीर

यह समझना जरूरी है कि आने वाले वर्षों में भारत में अचानक पूरी तरह ड्राइवरलेस कारें आम नहीं हो जाएंगी। वास्तविक परिवर्तन अधिक सूक्ष्म और क्रमिक होगा। AI-सक्षम फीचर्स, बेहतर सुरक्षा सिस्टम, स्मार्ट बैटरी प्रबंधन और कनेक्टेड इकोसिस्टम—ये सभी मिलकर भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को एक नई दिशा देंगे।

स्वदेशी कंपनियों का फोकस वैश्विक ट्रेंड की नकल करने की बजाय भारतीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने पर है। यही दृष्टिकोण इस बदलाव को टिकाऊ और व्यावहारिक बनाता है।

निष्कर्ष: तकनीक, यथार्थ और भविष्य का संतुलन

भारत में AI-आधारित स्वदेशी इलेक्ट्रिक वाहन एक उभरती हुई वास्तविकता हैं, न कि केवल भविष्य का सपना। 2026–2027 का दौर इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण साबित हो सकता है, जहां तकनीक, नीति और उपभोक्ता अपेक्षाएं एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करेंगी।

पूरी तरह स्वायत्त वाहन अभी शोध और प्रयोग के चरण में हैं, लेकिन AI-सक्षम EVs पहले ही भारतीय सड़कों पर मौजूद हैं। यह परिवर्तन धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से भारत के ऑटोमोबाइल परिदृश्य को बदल रहा है—और आने वाले वर्षों में यह बदलाव और स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

FAQs

Q1. क्या भारत में AI-आधारित इलेक्ट्रिक कारें उपलब्ध हैं?

हाँ, भारत में कुछ इलेक्ट्रिक वाहनों में AI-आधारित कनेक्टेड और ड्राइवर-असिस्ट फीचर्स उपलब्ध हैं। हालांकि, पूरी तरह ड्राइवरलेस कारें अभी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

Q2. क्या टाटा नेक्सन ईवी पूरी तरह AI कार है?

नहीं। टाटा नेक्सन ईवी पूरी तरह स्वायत्त वाहन नहीं है। इसमें AI-आधारित कनेक्टेड सिस्टम और ड्राइविंग-सपोर्ट फीचर्स हैं, जो बैटरी, रेंज और वाहन उपयोग को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद करते हैं।

Q3. महिंद्रा का MAIA प्लेटफॉर्म क्या है?

MAIA महिंद्रा द्वारा विकसित एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आर्किटेक्चर है, जिसे भारतीय सड़कों और ट्रैफिक परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग आगामी इलेक्ट्रिक वाहनों में किया जाना प्रस्तावित है।

Q4. क्या भारत में ड्राइवरलेस कारें आने वाली हैं?

वर्तमान में भारत में ड्राइवरलेस कारें शोध और परीक्षण के चरण में हैं। नियंत्रित वातावरण जैसे कैंपस, एयरपोर्ट या औद्योगिक क्षेत्रों में प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन आम सड़कों पर इनका व्यावसायिक उपयोग अभी नहीं है।

Q5. AI से इलेक्ट्रिक वाहनों में सबसे बड़ा फायदा क्या होता है?

AI का सबसे बड़ा फायदा बैटरी प्रबंधन, सुरक्षा फीचर्स, ड्राइविंग-सपोर्ट और वाहन की दीर्घकालिक कार्यक्षमता को बेहतर बनाना है।

Q6. क्या ओला इलेक्ट्रिक कार बना रही है?

ओला इलेक्ट्रिक ने आधिकारिक रूप से अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार परियोजना की जानकारी दी है। यह अभी विकास चरण में है और इसमें सॉफ्टवेयर-केंद्रित व AI-आधारित फीचर्स शामिल होने की संभावना जताई गई है।

Q7. क्या AI-आधारित EV भारतीय सड़कों के लिए सुरक्षित हैं?

AI सिस्टम को भारतीय सड़कों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में इन्हें ड्राइवर-सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखा जाता है, न कि ड्राइवर के विकल्प के रूप में।

Q8. बैटरी मैनेजमेंट में AI की क्या भूमिका है?

AI बैटरी के तापमान, चार्जिंग पैटर्न और उपयोग डेटा का विश्लेषण कर उसकी उम्र बढ़ाने और खराबी की पूर्व जानकारी देने में मदद करता है।

Q9. क्या AI-आधारित वाहन महंगे होते हैं?

AI-आधारित फीचर्स वाहन की कीमत को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन दीर्घकाल में बेहतर बैटरी लाइफ और कम मेंटेनेंस लागत से कुल खर्च संतुलित हो सकता है।

Q10. 2026–2027 में भारत का EV-AI फोकस किस दिशा में रहेगा?

इस अवधि में फोकस पूर्ण स्वायत्तता के बजाय सुरक्षित, नियंत्रित और व्यावहारिक AI-सक्षम इलेक्ट्रिक वाहनों पर रहने की संभावना है।